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घोषणाओं के पुल पर कब तक चलेगी राजनीति? वरुड रोड ओवरब्रिज पर पांढुर्णा की जनता का बड़ा सवाल"



"घोषणाओं के पुल पर कब तक चलेगी राजनीति? वरुड रोड ओवरब्रिज पर पांढुर्णा की जनता का बड़ा सवाल"

पांढुर्णा। चुनावी दौर में विकास के बड़े-बड़े वादे, शिलान्यास और लोकार्पण की चमकदार तस्वीरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन जब बात जमीनी हकीकत की आती है तो जनता जवाब तलाशती नजर आती है। पांढुर्णा शहर में वर्षों से लंबित वरुड रोड रेलवे फाटक ओवरब्रिज का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

रेलवे फाटक पर रोजाना लगने वाले लंबे जाम, घंटों का इंतजार और दुर्घटनाओं की आशंका से परेशान नागरिक पूछ रहे हैं कि आखिर वह दिन कब आएगा जब इस समस्या का स्थायी समाधान होगा। स्वीकृति, बजट और योजनाओं की बातें तो कई बार सुनने को मिलीं, लेकिन निर्माण कार्य की वास्तविक तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है।

शहरवासियों को कामठी जलाशय परियोजना का उदाहरण भी याद आ रहा है। लोगों का कहना है कि बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू हुई योजनाएं अक्सर कागजों और मंचीय भाषणों तक सीमित रह जाती हैं। ऐसे में वरुड रोड ओवरब्रिज को लेकर भी जनता के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें नए आश्वासन नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की शुरुआत और उसकी तय समय-सीमा चाहिए। क्योंकि हर चुनाव में विकास के नाम पर किए गए वादों की असली परीक्षा जनता की सुविधा और राहत से होती है।

अब पांढुर्णा की जनता का एक ही सवाल है—क्या वरुड रोड रेलवे ओवरब्रिज वास्तव में बनेगा, या फिर यह भी अधूरे सपनों और चुनावी घोषणाओं की फेहरिस्त में शामिल होकर रह जाएगा?

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