निवेश ट्रेडिंग नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड खुलासा
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद से साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है।
थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर पुलिस टीम ने निवेश, ट्रेडिंग और क्रिप्टो के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। मेरठ जोन एवं सहारनपुर परिक्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस ने यह सफलता हासिल की।
पुलिस के अनुसार, गृह मंत्रालय भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल प्रतिविम्ब पर मुजफ्फरनगर से जुड़ा एक संदिग्ध बैंक खाता चिन्हित हुआ था। जांच में सामने आया कि इस खाते के माध्यम से लोगों को इन्वेस्टमेंट, ट्रेडिंग,और क्रिप्टो में मुनाफे का लालच देकर ठगी की जा रही थी।
जांच के दौरान पता चला कि केवल सात दिनों के भीतर इस बैंक खाते में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। आगे की पड़ताल में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 46 साइबर शिकायतें सामने आईं, जिनमें लगभग 14 करोड़ 8 लाख रुपये से अधिक की ठगी की पुष्टि हुई।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान अभिनव चौहान और सक्षम गुप्ता, निवासी नई मंडी थाना क्षेत्र मुजफ्फरनगर के रूप में हुई है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर एस ए स्मार्ट ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कंपनी बनवाई और दिसंबर 2025 में एक्सिस बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया। इसी खाते में निवेश के नाम पर लोगों से ठगी की रकम जमा कराई जाती थी। आरोपियों को कुल ठगी गई रकम का एक प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया गया था।
बरामद मोबाइल फोन की जांच में भी बड़े साइबर गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों की विस्तृत जांच जारी है।
इस पूरी कार्रवाई को थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर के प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अंजाम दिया।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग या क्रिप्टो योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दे।