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भोपाल की झीलों धरोहरों का होगा संरक्षण औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से विकास को मिलेगी गति

रिपोर्टर देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल मध्यप्रदेश
जिले में समग्र विकास को गति देने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फण्ड के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। इसी क्रम में उन्होंने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकास कार्यों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की। कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि सीएसआर फण्ड के माध्यम से भोपाल की झीलों, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि औद्योगिक इकाइयाँ अपने वार्षिक सीएसआर प्लान में झीलों के किनारों पर मियावाकी तकनीक से वृक्षारोपण, ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार, पार्कों का पुनर्विकास तथा प्राचीन बावड़ियों और कुओं के संरक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दें।उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी योगदान बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि वृद्धाश्रम, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष स्कूल, ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल स्कूल निर्माण तथा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्ट्स को भी सीएसआर के तहत शामिल किया जाए। साथ ही मेट्रो एवं फ्लाईओवर के नीचे स्पोर्ट्स टर्फ विकसित करने जैसे नवाचारों को भी प्रोत्साहित किया गया।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सीएसआर से किए जाने वाले सभी कार्यों की प्रशासनिक स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। बैठक में एमपीआईडीसी के अधिकारियों के साथ समन्वय कर इंडस्ट्रियल हाउसिंग प्रोजेक्ट, स्लम पुनर्वास, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और भविष्य की शहरी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि इन पहलों से न केवल आधारभूत सुविधाओं का विकास होगा, बल्कि औद्योगिक इकाइयों को कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध हो ससकेगा एमपीआईडीसी के ईडी श्री विशाल सिंह चौहान ने बताया कि बैठक में टेक्सटाइल, गारमेंट एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सीएसआर फण्ड का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल और पर्यावरण संरक्षण प्रमुख क्षेत्र रहेंगे। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती इला तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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