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सावधान! अखंड रामायण पाठ में संपुट की गलती फेर सकती है आपकी मेहनत पर पानी

सावधान! अखंड रामायण पाठ में संपुट की गलती फेर सकती है आपकी मेहनत पर पानी
​प्रयागराज/सुल्तानपुर: हिंदू धर्म में अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ को कष्ट निवारण और सुख-समृद्धि का अमोघ साधन माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भक्ति भाव से किए जा रहे इस पाठ में एक छोटी सी तकनीकी चूक आपको इसके पूर्ण फल से वंचित कर सकती है? वर्तमान में धार्मिक आयोजनों में 'संपुट' के गलत प्रयोग को लेकर विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
​ऊर्जा विज्ञान है रामचरितमानस
​सुल्तानपुर (यूपी) के बीबीगंज रोड स्थित चंद्रकला धाम के संचालक और प्रसिद्ध ज्योतिष विशेषज्ञ पंडित संतोष दूबे जी ‘सिद्ध कलावा’ वाले ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रीरामचरितमानस केवल एक काव्य ग्रंथ नहीं, बल्कि एक जीवंत 'ऊर्जा विज्ञान' है। पाठ के दौरान किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए जिन मंत्रों या चौपाइयों को जोड़ा जाता है, उसे 'संपुट' कहते हैं।
​पंडित संतोष दूबे के अनुसार, "संपुट लगाने की एक निश्चित शास्त्रीय विधि होती है। यदि संपुट का चयन या उच्चारण शास्त्रसम्मत नहीं है, तो पाठ से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे न केवल अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, बल्कि कई बार श्रद्धालु की मानसिक शांति और आस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।"
​अधूरी जानकारी बन रही है बाधा
​आजकल देखा जा रहा है कि कई स्थानों पर बिना पूर्ण ज्ञान के संपुट का प्रयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्साह में आकर धार्मिक अनुष्ठान करना पर्याप्त नहीं है; विधि और विधान का सही समन्वय ही ईश्वरीय कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है। अधूरी जानकारी के कारण किए गए आयोजनों से आध्यात्मिक ऊर्जा का ह्रास होता है।
​निष्कर्ष और समाधान
​धार्मिक विद्वानों का मत है कि किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व योग्य विद्वानों से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। यदि आप भी अपने निवास या मंदिर में अखंड पाठ का आयोजन कर रहे हैं, तो सही संपुट और विधि की जानकारी के लिए पंडित संतोष दूबे जी से उनके मोबाइल नंबर +91-9213032623 पर संपर्क कर सकते हैं।
​याद रखें, भक्ति के साथ सही विधि का होना ही वास्तविक और पूर्ण फल प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है।

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