मिर्गी के दौरे का सीमित समय में यूनानी चिकित्सा से ईलाज : डॉ लियाक़त अली मंसूरी
दौरे या मिर्गी के दौरे मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—
A. फोकल (आंशिक) और
B. सामान्यीकृत
सबसे पहले यह मस्तिष्क के एक हिस्से या दोनों हिस्सों में शुरू होते हैं, फिर इन्हें आगे कई उप-प्रकारों (जैसे टॉनिक-क्लोनिक, अनुपस्थिति, मायोक्लोनिक, एटोनिक) में बांटा जाता है, जिनमें बेहोशी, ऐंठन, झटके या सिर्फ चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखते हैं, और कभी-कभी फोकल दौरे से सामान्यीकृत दौरे में बदल सकते हैं (द्वितीयक सामान्यीकृत) ।
मुख्य श्रेणियाँ—
A. फोकल दौरे (पहले आंशिक दौरे)—ये मस्तिष्क के एक छोटे हिस्से से शुरू होते हैं।
1. फोकल सचेत दौरे—व्यक्ति होश में रहता है, अजीब संवेदनाएं, स्वाद या गंध महसूस कर सकता है, या स्वचालित हरकतें (जैसे हाथ रगड़ना) कर सकता है।
2. फोकल बिगड़ी जागरूकता वाले दौरे—चेतना प्रभावित होती है, भ्रम, या स्वचालित क्रियाएं (जैसे चबाना, घूमना) हो सकती हैं ।
B. द्वितीयक सामान्यीकृत दौरे—फोकल दौरे से शुरू होकर फिर पूरे मस्तिष्क में फैल जाते हैं, जिससे वे सामान्यीकृत दौरे जैसे लगते हैं ।
1. सामान्यीकृत दौरे—ये मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों (दोनों तरफ) को प्रभावित करते हैं ।
2. टॉनिक-क्लोनिक —शरीर अकड़ जाता है (टॉनिक), फिर तेज झटके लगते हैं (क्लोनिक), बेहोशी और कभी-कभी जीभ काटने या मूत्र असंयम के साथ ।
3. अनुपस्थिति वाले दौरे —कुछ सेकंड के लिए खाली घूरना, पलकें झपकाना, कोई प्रतिक्रिया न देना; व्यक्ति को याद नहीं रहता ।
4. मायोक्लोनिक —अचानक, तेज, छोटे झटके (जैसे बिजली का झटका) के साथ दौरे आना ।
5. एटोनिक —मांसपेशियों में टोन खत्म हो जाती है, जिससे व्यक्ति अचानक गिर जाता है ।
6. टॉनिक —सिर्फ मांसपेशियों का अकड़ना, बेहोशी के साथ, लेकिन झटके नहीं ।
7. अज्ञात शुरुआत दौरे—जब यह पता नहीं चलता कि दौरा फोकल था या सामान्यीकृत, तो इसे अज्ञात शुरुआत वाला दौरा कहा जाता है। दौरे हल्के, गंभीर या अदृश्य भी हो सकते हैं ।
यूनानी चिकित्सा — किसी भी प्रकार के दौरे आने पर हर्बल यूनानी चिकित्सा पूरी तरह कारगर साबित हो रही हैं, कई दौरे के मरीजों पर यूनानी चिकित्सा का प्रयोग किया गया जिसमें परिणाम पॉजिटिव मिले हैं , जो मरीज़ बरसों से अन्य पैथियों से इलाज करा रहे थे लेकिन रोग से मुक्ति नहीं मिल रही थी ऐसे मरीज़ों को यूनानी चिकित्सा से कम समय में ही मिर्गी या झटके रोग से मुक्ति मिली है इसके लिए यूनानी चिकित्सक से परामर्श लेकर ही उपचार लेना चाहिए, यहाँ निम्न यूनानी उपचार दिया जा रहा हैं—
हब्बे दीदान, हब्बे सरा , ख़मीरा गवाज़बान जदवार उद सलीब वाला, शरबत उस्तौख़ुद्दुस और माजून नुजाह आदि का प्रयोग किया जाता हैं ।
डॉ. लियाक़त अली मंसूरी
(यूनानी चिकित्सक एवं हिज़ामा
थैरेपी विशेषज्ञ) सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर ( राज.)