वर्दी कानून से ऊपर नहीं: पत्रकार से अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों पर गिरेगी बीएनएस की गाज
सुलतानपुर । लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर कानूनी स्थिति अब और भी स्पष्ट हो गई है। यदि कोई पुलिसकर्मी किसी पत्रकार के साथ अभद्रता, गाली-गलौज या मारपीट करता है, तो उसे अब न केवल विभागीय जांच बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमों का भी सामना करना पड़ेगा।
कानून का दुरुपयोग पड़ेगा भारी
अक्सर फील्ड ड्यूटी के दौरान पुलिस और पत्रकारों के बीच टकराव की खबरें आती हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस की वर्दी उन्हें कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं देती। यदि कोई लोक सेवक अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर किसी पत्रकार को अवैध रूप से हिरासत में लेता है या झूठे रिकॉर्ड बनाता है, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 220 और 221 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अपराध और लागू होने वाली धाराएँ
पत्रकारों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के आधार पर निम्नलिखित कानूनी प्रावधान प्रभावी होंगे:
अभद्रता एवं अपमान: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों का प्रयोग करने पर धारा 296 और शांति भंग करने की नीयत से अपमान करने पर धारा 352 लागू होगी।
मारपीट व धमकी: जान से मारने या डराने पर धारा 351 और शारीरिक चोट पहुँचाने पर धारा 115/117 के तहत मामला दर्ज होगा।
अवैध हिरासत: गलत तरीके से रोकने या बंधक बनाने पर धारा 126 और 127 के तहत शिकंजा कसा जाएगा।
महिला सुरक्षा: महिला पत्रकारों के सम्मान को ठेस पहुँचाने पर धारा 74 और 79 के तहत कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
कहाँ करें शिकायत?
पीड़ित पत्रकार केवल चुप बैठने के बजाय SP/SSP कार्यालय, पुलिस शिकायत प्राधिकरण या सीधे न्यायालय में परिवाद दाखिल कर सकते हैं। मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में राज्य या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वीडियो, ऑडियो और मेडिकल रिपोर्ट जैसे साक्ष्य मामले को कोर्ट में मजबूती प्रदान करते हैं।