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शासन प्रशासन के पदाधिकारी के द्वारा ओलावृष्टि क्षेत्र का दौरा किया।

शासन प्रशासन के पदाधिकारी के द्वारा ओलावृष्टि क्षेत्र का दौरा किया गया।


खंडार तहसील क्षेत्र में 27 जनवरी 2026 को सायं काल मे दो दर्जन से अधिक ग्रामों में बड़ी भारी स्थिति पर ओलावृष्टि का दौर शुरू हुआ।
ओलावृष्टि की मार दो दर्जन से अधिक ग्रामों के
किसने की रवि की फसल एवं अमरूद के बगीचे एवं आंवला एवं फल फ्रूट्स के बगीचे पूरे तबाह हो गए। दूसरी ओर मिर्ची टमाटर एवं साग सब्जी की बाडियां पूरी तरह से बर्बाद हो गई। जिससे दो दर्जन से अधिक ग्रामों के किसानों पर बड़ी ही आर्थिक संकट की मार पड़ी है। अभी की हालातो में किसानों के चेहरों पर आर्थिक चिंता की शोक लहर देखी जा रही है। ऐसे हालातो में पीड़ित किसानों खेर खबर लेने के लिए। शासन प्रशासन के अधिकारियों द्वारा ओलावृष्टि वाले क्षेत्र का दौरा किया गया। जिसमें जिला कलेक्टर सवाई माधोपुर एवं उप जिला कलेक्टर वर्षा मीणा खंडार एवं खंडार उपखंड मुख्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पीड़ित किसानों से मिलकर ओलावृष्टि क्षेत्रों की घटनास्थल का जायजा लेते हुए। पीड़ित किसानों को सरकारी नियमों के तहत फसल खराब दिलाने का आश्वासन दिया गया। कई जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों को पीड़ित किसानों का आक्रोश का सामना भी करना पड़ा है। क्योंकि इस क्षेत्र में कई बार किसने की फसल अतिव्यष्टि एवं ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हो गई। जिसमें प्रशासन द्वारा पीड़ित किसानों को फसल खराब दिलाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन समय व्यतीत होने के बाद में पीड़ित किसानों को सरकारी नियमों के जाल में फंस कर एवं आलतू फालतू के नियमों में उलझा कर फसल खराबी से वंचित किया गया। अभी विगत वर्ष खंडार तहसील क्षेत्र के दक्षिणी भाग में 2025 के जुलाई अगस्त के महीने में अतिवृष्टि की वर्षा से कई ग्रामों के किसने की खरीद की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। उसे समय भी शासन प्रशासन के पदाधिकारी द्वारा अतिवृष्टि क्षेत्र का दौरा करके सरकार द्वारा फसल खराब दिलाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन लेकिन आज तक भी पीड़ित किसानों को फसल खराब के नाम पर मायूसी ही हाथ लगी है।
जिससे कई जगह के किसानों में भारी मात्रा में आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसीलिए कई जगह पर प्रशासनिक अधिकारियों को पीड़ित किसानों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा है। पीड़ित किसानों का यहां तक भी कहना है कि हम पीड़ित किसानों ने कई बार फसल खराबी को लेकर प्रकृति का आपदा पोर्टल पर भी अपना मूल्य खर्च करके राजस्थान सरकार से फसल खराबी के लिए। गुहार लगाई लेकिन आज तक के हालातो तक भी हमको फसल खराबी का मुआवजा नहीं मिला है। जिससे शासन प्रशासन के पदाधिकारी का आश्वासन मिथ्या नजर आता है। इसीलिए राजस्थान सरकार को पीड़ित किसानों के सहयोग के लिए। फसल खराबे को लेकर सख्त कम उठाने की आवश्यकता है। क्योंकि इस क्षेत्र का किसान कर्ज लेकर बड़ी मेहनत करके अपनी कृषि तैयार करता है। उसके पश्चात भी प्रकृति का आपदा से अगर फसल नष्ट हो जाती है तो किसानों पर बड़ी भारी स्थिति पर आर्थिक मार पड़ती है। इसीलिए क्षेत्र के किसानों ने फसल खराबा के मुआवजे को लेकर राजस्थान सरकार एवं भारत सरकार से गुहार लगाई है।

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