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बेटियों के सम्मान पर कोई समझौता नहीं होगा , चाहे इसके लिए हमें सड़क पर क्यों न उतरना पड़े।

खरखौदा/सोनीपत/हरियाणा/सोमपाल सैनी - 7988804545, 8950236003

_"बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ" के विद्यार्थियों के साथ अपमानजनक व्यवहार, निजी बस संचालकों की मनमानी – प्रशासन मौन क्यों? : देवेन्द्र गौतम

हरियाणा सरकार मंचों से लगातार “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे ठीक उलट नज़र आ रही है। अन्याय के विरुद्ध - न्याय युद्ध मंच के संस्थापक समाजिक कार्यकर्त्ता देवेन्द्र गौतम ने सरकार के इस नारे पर सवाल उठाते हुवे सरकार व प्रशासन को जमीनी हक़ीक़त दिखाते हुवे जनहित में जवाब तलब किए हैं।

गौतम ने कहा कि सोनीपत जिले से महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक पढ़ने जाने वाली छात्राओं के साथ निजी बस संचालकों द्वारा सफऱ के वक़्त दुर्व्यवहार किया जाता हैं जो न केवल शर्मनाक है बल्कि संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। पीड़ित छात्रा ने देवेन्द्र गौतम को फ़ोन पर बताया कि वह नियमित रूप से एमडीयू रोहतक पढ़ने जाती है।

सभी छात्राओं के पास वैध बस पास उपलब्ध हैं लेकिन उसके बावजूद निजी बस कंडक्टरों द्वारा पास मानने से इनकार किया जाता है। बस चालक और कंडक्टर के द्वारा छात्राओं को बस से उतारने की धमकी देने के साथ साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। छात्राओं द्वारा एसडीएम खरखौदा को दी गई शिकायत पत्र में बस नंबरों को प्रमुख रूप से दर्शाया भी गया है।

देवेन्द्र गौतम ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि यह मामला पहले ही एसडीएम खरखौदा, आर टो ओ रोहतक, और 112 नंबर तक छात्राओं के माध्यम से पहुँचाया जा चुका है। न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट आदेश मौजूद है कि बस पास सभी बसों (सरकारी व निजी) में मान्य होगा, इसके बावजूद निजी बस संचालक खुलेआम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है।

*देवेन्द्र गौतम के सवाल सीधे सरकार और प्रशासन से

क्या “बेटी पढ़ाओ” का मतलब यही है कि बेटियों को रोज़ अपमान सहना पड़े? क्या निजी बस संचालक कानून से ऊपर हो चुके हैं? जब कोर्ट का आदेश मौजूद है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या प्रशासन किसी दबाव में है?

यह केवल कुछ छात्राओ का मामला नहीं है, बल्कि यह हजारों बेटियों की गरिमा, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार का प्रश्न है। देवेन्द्र गौतम ने सरकार को स्थानीय प्रशासन व परिवहन विभाग के सामने स्पष्ट माँग रखी हैं कि

1. दोषी बस चालकों व कंडक्टरों पर तत्काल FIR दर्ज हो, 2. संबंधित बसों के परमिट रद्द किए जाएँ व
3. सभी निजी बस संचालकों को लिखित निर्देश जारी हों कि बस पास हर हाल में मान्य होगा।

देवेन्द्र गौतम ने कहा कि छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और जिला प्रशासन इस पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करे।

यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो छात्राओं, अभिभावकों के साथ मिलकर सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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