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बोधगया में स्थापित हुई देश की सबसे बड़ी भगवान बुद्ध की प्रतिमा, प्रतिमा की लंबाई 100 फीट, ऊंचाई 30 फीट और चौड़ाई 24 फीट है, कई देशों के हजारों बौद्ध गुरुओं ने मंत्रोच्चार के साथ किया उद्घटान, बोधगया में पर्यटकों के लिए होगी सबसे बड़ी आकर्षण का केंद्र।

बोधगया।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में भगवान बुद्ध का देश में भगवान बुद्ध की 100 फीट की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित हुई है। रविवार को कई देशों के बौद्ध धर्मगुरुओं की मौजूदगी में विशाल प्रतिमा का अनावर्णय हुआ। बुद्धा इंटरनेशनल वेलफेयर मिशन के द्वारा प्रतिमा का स्थापना किया गया है। बोधगया रिवर साइड के3 अमावां स्थित यह विशाल प्रतिमा यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी।
बुद्ध की यह प्रतिमा शयन मुद्रा में है। जो 100 फीट लंबी और 30 ऊंची होगी। प्रतिमा की चौड़ाई 24 फीट है। उद्घाटन सत्र में थाईलैंड, कंबोडिया, तिब्बत, श्रीलंका, वियतनाम, बांग्लादेश सहित कई देश के वरीय बौद्ध भिक्षु व श्रद्धालु शामिल हुए। महायानी और थेरवादी देशों के बौद्ध धर्मगुरुओं ने सुत्त पाठ विशेष पूजा किया। इसके बाद विधिवत प्रतिमा उद्घाटन किया।
इस अवसर पर बौद्ध धर्मगुरुओं ने विश्वकल्याण की कामना की। बुद्धा इंटरनेशनल वेलफेयर मिशन के फाउंडर सेक्रेटरी भिक्खु आर्य पाल ने बताया कि भगवान बुद्ध की इस मुद्रा में पूरे भारत में सबसे लंबी प्रतिमा होगी। कोलकाता के मशहूर मूर्तिकार मिंटू पॉल बेहद बारीकी से प्रतिमा के निर्माण किया है। बोधगया में देश-विदेश के लाखों पर्यटक आते है। इन पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित 80 फुट भवान बुद्ध की मूर्ति करती है। लेकिन अब पर्यटकों के लिए यह मूर्ति आकर्षण का केन्द्र होगी।

भगवान बुद्ध की शयन मुद्रा वाली लंबी प्रतिमा को 50 टुकड़ों में तैयार किया गया है। इसके एक-एक हिस्से को बेहद बारीकी से तैयार किया गया। ये मूर्ति पूरी तरह से फाइवर ग्लास से बन रही है। प्रतिमा का निर्माण 2019 में शुरू हुआ है। चार साल बाद बनकर तैयार हुआ। उन्होंने कहा बोधगया में 80 फीट की भगवान बुद्ध की मूर्ति ध्यान मुद्रा में है। लेकिन प्रतिमा शयन मुद्रा में है। इसमें भगवान बुद्ध का दाहिना हाथ उनके सिर टिका रहेगा और सिर उत्तर दिशा में रहेगा। चेहरे पर शांत भाव और आंखे बंद रहेंगी। दोनों होंठ एक दूसरे से सटे हुए होंगे। चेहरे पर मुस्कान की छलक दिखेगी। मूर्ति में कान लंबे और बाल घुंघराले, बाया हाथ शरीर पर टिका हुआ है। बताया कि भगवान बुद्ध ने इसी मुद्रा में अपने शिष्यों को अंतिम संदेश दिया था और बताया था कि तीन माह बाद उनकी मृत्यु होगी। 80 साल की अवस्था में कुशीनगर में उन्हें महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी

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