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कलयुग केवल नाम अधारा पं0 राघवेंद्र शास्त्री सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) सलेमपुर के हरैया में चल रहे श्रीमद

कलयुग केवल नाम अधारा पं0 राघवेंद्र शास्त्री

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
सलेमपुर के हरैया में चल रहे
श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक पं0 राघवेंद्र शास्त्री जी ने भागवत कथा का महत्व बताते हुए प्रभु राम व कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। शास्त्री जी ने कहा कि कलयुग में भागवत की कथा सुनने से जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जन्म जन्मांतर के पापों का अंत भी होता है।
राम विवाह के प्रसंग में उन्होंने बताया कि माता सीता भक्ति और शक्ति की रूप हैं और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक है। उन्होंने श्रीराम विवाह प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मां सीता के विवाह के लिए हो रहे धनुष यज्ञ प्रकरण के दौरान जब कोई भी राजा धनुष नहीं तोड़ पाए तो जनक जी परेशान हो गए। इसके बाद गुरू विश्वामित्र जी बोले हे राम उठो और धनुष को तोड़कर जनक के दुख को दूर करो। गुरू की आज्ञा पाकर भगवान राम उठे और धनुष को तोड़ दिया।
सीताजी ने भगवान राम के गले में जयमाला डाल दिया। श्रीराम जन्म की कथा के दौरान हो रहे संगीत की धुन पर श्रोता झूम उठे। पं0 राघवेंद्र शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों को श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा भक्तों को श्रवण कराते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए और वासुदेव की बेड़ियां खुल गईं। वासुदेव भगवान ने श्रीकृष्ण इस संसार के पालनहार हैं। एक टोकरी में लेकर यमुना नदी को पार कर यशोदा मां और नंदलाल के पास छोड़ जाते हैं।
इसकी कानोकान खबर कंस को नहीं लग पाती। भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्टों का नाश करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया था। इस धरती को अधर्म से मुक्ति दिलाई। पंडित शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में जन्म लेने पर "नन्द के आनंद भयों जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की सहित अनेक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने माखन मिश्री का प्रसाद लगाकर जमकर उत्सव मनाया गया।
उक्त अवसर पर मुख्य यजमान राधिका देवी,सुभाषचन्द्र दुबे,अजय दूबे वत्स,अशोक तिवारी,अनूप उपाध्याय,सतीश दुबे,शैलेंद्र दुबे,कृपाशंकर मिश्र,संजय चतुर्वेदी, अंकित त्रिवेदी एवम विष्णुधर द्विवेदी,अनिल मिश्र आदि लोग मौजूद रहे

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