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Jitendra Jaysawal

उत्तराखंड तैयार • Jitendra Jayswal

हल्द्वानी की जगह टनकपुर पहला पड़ाव

कैलाश यात्रा की तैयारी जून से, 24 के बजाय 10 दिन में होगी
पहले 95 किमी पैदल चलते थे, अब पूरा सफर वाहन से
मनमीत |देहरादून
चीन आधिपत्य वाले तिब्बत में मौजूद कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी शुरू हो चुकी है। 2019 से बंद इस यात्रा के लिए भारतीयों का पहला जत्था जून के पहले हफ्ते में रवाना हो सकता है। चीन के साथ यात्रा पर सहमति के बाद हाल ही में विदेश मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार की पहली बैठक हुई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस बार यात्रा में कई बदलाव दिखेंगे। जैसे-नई दिल्ली से निकलने के बाद यात्रियों का पहला पड़ाव करीब 330 किमी दूर टनकपुर में होगा। पहले हल्द्वानी था। दूसरा, नई दिल्ली से लिपुलेख दर्रे तक गाड़ियों से जाएंगे। इस दरें के दूसरी तरफ चीन बॉर्डर शुरू होता है, जहां पठार होने से टू लेन रोड बनी है, यहां से बसें कैलाश ले जाएंगी।

पिथौरागढ़ के पर्यटन अधिकारी कीर्तिराज आर्य ने बताया कि हमने तैयारी शुरू कर दी है। अबकी बार धारचूला से तवाघाट होते हुए एक ही दिन में लिपुलेख दरें से 30 किमी पहले गुंजी गांव पहुंचेंगे। पहले 8 दिन लगते थे। यानी दिल्ली से चलने के बाद चौथे या 5वें दिन आप कैलाश क्षेत्र में होंगे। इतना ही समय लौटने में लगेगा। इससे 24 दिन में होने वाली यात्रा 10 दिन में हो जाएगी।

ऐसे समझें... 10 दिन का यात्रा रूट- कैलाश पर्वत तिब्ब तराक्षस ताल-मानसरोवर लेक भारत नाभीढांग लिपुलेख
दर्रा गुंजी तवा घाट धारचूला-काली नदी नेपाल
2019 की व्यवस्थाः दिल्ली से हल्द्वानी, तवाघाट तक गाड़ी। फिर गुंजी से लिपुलेख तक 95 किमी का पैदल सफर। आगे कैलाश तक जाने और वहां से हल्द्वानी आने में 24 दिन लगते थे।
• और 2025: दिल्ली से 1 दिन में टनकपुर।
टनकपुर
अगले दिन धारचूला। फिर गुंजी व लिपुलेख । चौथे दिन तिब्बत से कैलाश पर्वत। 9वें दिन टनकपुर लौटेंगे। बुदि, गुंजी, नाभीढांग, लिपुलेख में कुमाऊं मंडल विकास निगम के होमस्टे में रुकेंगे।

• कितना खर्च... तय होना बाकीः 2019 में चीन ने

वीसा एंट्री फीस 100 डॉलर ली थी। अभी ये तय नहीं हुई है। केएमवीएन का पैकेज भी तय होना है। 2019 में प्रति व्यक्ति कुल यात्रा खर्च 2.50 लाख रु. तक था। नेपाल से अभी यात्रा करते हैं तो 1.84 लाख चीन-काठमांडू की फीस और 24 हजार रु. पोर्टर के अलग से लगते हैं।

इतनी तैयारी कर लेंः पासपोर्ट, जिसकी वैधता यात्रा

समाप्ति के 6 माह बाद तक हो। 100 रु. का स्टाम्प पेपर, जिस पर नियम मानने का शपथ पत्र होगा। इमरजेंसी में वापसी का शपथ पत्र। चीन में मृत्यु होती है तो दाह संस्कार की लिखित अनुमति। चीन का वीसा शुल्क और तिब्बत में आवास और परिवहन के लिए नकद डॉलर देने होंगे।

लिपुलेख के रास्ते का जिक्र स्कंद पुराण में भी... भारत से कैलाश यात्रा के तीन

रास्ते हैं। पहला सिक्किम के नाथूला दरें से 802 किमी लंबा रूट। दूसरा, लिपुलेख दर्श। यहां से कैलाश सिर्फ 65 किमी दूर है। तीसरा नेपाल रूट, जो काठमांडू से 400 किमी दूर है। स्कंद पुराण के मानस खंड में कूर्मांचल पर्व के अध्याय 11 में कैलाश यात्रा के लिपुलेख का जिक्र है। लिखा है कि कैलाश का मार्ग उत्तराखंड की शारदा या काली नदी के किनारे से होकर गुजरता है।



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