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साहित्य मे पर्यावरण संरक्षण विषय पर विचार गोष्ठी. श्री जगदीश जोशी समेत प्रशस्ति पत्र से सम्मानित

साकेत साहित्य संस्थान उप शाखा

जिला उदयपुर ने " साहित्य में पर्यावरण सरंक्षण" विषय पर विचार गोष्ठी एव काव्य पाठ का किया आयोजन







साकेत साहित्य संस्थान राजसमंद की , उप शाखा जिला उदयपुर ने झाड़ोल (फ) मुख्यालय पर आज "साहित्य में पर्यावरण संरक्षन " विषय पर विचार गोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन जे आर शर्मा , स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाड़ोल में किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार ,पूर्व प्राचार्य भेरूलाल लोहार,विशिष्ट अतिथि श्री जगदीश जी जोशी,वरिष्ठ साहित्यकार व्यंग्यकार ,और , अध्यक्षता , डॉ महावीर जैन प्राचार्य जे आर शर्मा महाविद्यालय झाडोल ने की।अतिथियों ने , मां सरस्वती के दीप प्रज्जवल कर वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । साकेत साहित्य संस्थान जिला उदयपुर जिला अध्यक्ष कार्यक्रम संयोजक मदन जोशी सार्थक युवा साहित्यकार ने मंचासीन अतिथियों का तिलक उपरना ओढ़ाकर स्वागत अभिनन्दन किया ,जिसके बाद कार्यक्रम मुख्य उद्देश्य की और गतिमान हुआ ।सर्वप्रथम जिला अध्यक्ष ने , साकेत साहित्य संस्थान , का सभी अतिथियों से ,साहित्यकारों से परिचय कराया उसका उद्देश्य बताया और उसकी वर्तमान गतिविधियों पर प्रकाश डाला।फिर आज के विचार गोष्ठी का मुख्य विषय साहित्य में पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार प्रस्तुत किये ,इन्होने वेद,पुराण, इतिहास,रामायण, महाभारत,श्री मदभागवत गीता, और , हिंदी साहित्य में किस प्रकार , पर्यावरण संरक्षण को बताया है कैसे किया जाता था को पटल पर प्रस्तुत किया जोशी ने बताया कि वेद सिर्फ पूजा की किताब नहीं ,धरती बचाने का पहला संविधान है ,रामायण सिर्फ कथा नहीं एक इको मैन्युअल सिस्टम है जिसमें वन संरक्षण ,जल स्रोतो की पूजा ,पशु पक्षी से मित्रता,पंचतत्व् संतुलन,और अहिंसा को प्रमुख स्थान दिया ,साहित्य कहता हैं पेड़ गिनो मत,पेड़ से रिश्ता जोड़ो तभी वो कटेगा नहीं और अंत मे बताया हर पुराण ने पृथ्वी को माता, प्रकृति को देव, मानकर जीने का विज्ञान दिया ।

डॉक्टर महावीर जैन ने पर्यावरण की आधुनिक स्तिथि को सबके समक्ष रखा और संरक्षण के उपाय बताये,राजीव गौड़ प्रधानाचार्य ने नदियों की बिगड़ते हालात ,प्रदूषित जल ,और पर्यावरण प्रदूषण के लिए मानव को जिम्मेेदार बताया ,मानव ही स्वयं प्रदूषण न करे तो , जल,पृथ्वी, और प्रकृति सुरक्षित रहेगी ,समाजसेवी कृपा शंकर जोशी ने एक प्रेरक गीत गाकर पर्यावरण का संदेश दिया ,डॉक्टर सतीश जोशी ने धरती माँ को बचाने का आहवान कविता के द्वारा किया,श्री मती सिद्धि जैन युवा कवयित्री ने धरती की करुण पुकार को कविता के माध्यम से सुनाया,प्रोफेसर जगदीश ने ,प्रकृति के प्रति मानव की प्रेम को अपने विचारों से प्रकट किया ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भेरुलाल जी साकेत ने साकेत संस्थान के इस प्रयास की सराहना की और पर्यावरण सुंदर स्वच्छ बनाने की प्रेरणा दी।अंत मे ,साकेत साहित्य संस्थान के उपाध्यक्ष जगदीश जोशी ने सुंदर आयोजन के लिए सभी साहित्यकारो को बधाई दी और ,पर्यावरण संरक्षण पर एक बेहद मार्मिक रचना सुनाई और जागरूकता का संदेश दिया ।कार्यक्रम के अंत में ,साकेत ,संस्थान के मुख्य पटल पर ,आने वाली रचनाओं की 15- 15 दिवस समीक्षा करने वाले जगदीश जोशी ,श्री मती सिद्धि जैन,खुमान लाल शर्मा को संस्था ने प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया ।और ,कार्यक्रम संयोजक जिला अध्यक्ष में सभी का आभार व्यक्त किया ।

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