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क्या इस साल मानसून पर मंडरा रहा है एल-नीनो का खतरा? जानिए भारत पर कितना पड़ सकता है असर

नई दिल्ली। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस बार मौसम वैज्ञानिकों की नजर एल-नीनो की संभावित वापसी पर टिकी हुई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिए हैं कि 2026 के दौरान एल-नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, जिससे देश में मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है।

IMD के अनुसार, 2026 में देशभर में मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम माना जाता है। मौसम विभाग का कहना है कि एल-नीनो बनने की स्थिति में कई राज्यों में वर्षा की कमी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एल-नीनो मजबूत हुआ तो कृषि, जल संसाधन और खाद्य उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि गर्मी और हीटवेव की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी "सुपर एल-नीनो" की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले हफ्तों में नए आंकड़ों के आधार पर पूर्वानुमान अपडेट किए जा सकते हैं।

फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान और संबंधित विभाग मौसम विभाग द्वारा जारी होने वाले नियमित अपडेट पर नजर बनाए रखें।

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