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हिंदी कविता: परिंदों सा उड़ान भरो में स्वतंत्रता का संदेश

यह हिंदी कविता 'परिंदों सा उड़ान भरो' जीवन में स्वतंत्रता और आशा की भावना को दर्शाती है। कविता में उड़ान भरने वाले परिंदों की तुलना करते हुए, जीवन में ऊंचाइयों को छूने और नयी संभावनाओं की खोज करने का संदेश दिया गया है।



कविता सरल भाषा में व्यक्त की गई है, जो पाठकों को प्रेरित करती है कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए साहस और उत्साह के साथ आगे बढ़ें। इसमें परिंदों की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास की छवि को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।


परिंदों सा उड़ान भरो

परिंदों सा उड़ान भरो, खुले गगन की शान बनो, जो राहों में दीवारें हों, उन दीवारों की पहचान बनो।

मत डरना तुम आँधियों से, मत झुकना कठिन सवालों से, जो ठान लिया है मन में तुमने, उसे पूरा करो अपने ख्यालों से।

जब सूरज तपता माथे पर, जब छाँव कहीं भी मिलती नहीं, तब हौसलों की चादर ओढ़ो, क्योंकि मंज़िल यूँ ही मिलती नहीं।

नदियों से सीखो बहते रहना, पर्वत से सीखो अडिग खड़े रहना, फूलों से सीखो मुस्कुराना, काँटों में भी खुशबू बनकर रहना।

गिरना अगर तक़दीर में हो, तो गिरकर फिर संभल जाना, हार को अपनी जीत बनाकर, नई कहानी लिखते जाना।

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