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अभिमान मनुष्य के पतन का कारण, विनम्रता ही जीवन का आभूषण : पं. मनोज त्रिवेदी

अभिमान मनुष्य के पतन का कारण, विनम्रता ही जीवन का आभूषण : पं. मनोज त्रिवेदी
सोजत। परम पावन पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्री गिरिराज जी मंदिर के निकट कोठी सुल्तान बाजार स्थित विश्रामगढ़ गोपूजा समाज वाड़ी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान व्यासपीठ से कथामृत का रसपान कराते हुए पंडित मनोज त्रिवेदी श्रीमाली ने कहा कि जीवमात्र को अपने जीवन में रूप, पद, प्रतिष्ठा, धन अथवा किसी भी प्रकार की उपलब्धि का अभिमान नहीं करना चाहिए। मनुष्य को सदैव सरल, विनम्र एवं सहज स्वभाव बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभिमान मनुष्य के पतन का प्रमुख कारण है। जिस व्यक्ति के हृदय में अहंकार प्रवेश कर जाता है, उसके सद्गुण धीरे-धीरे क्षीण होने लगते हैं। संसार में कोई भी वस्तु, वैभव, पद या प्रतिष्ठा स्थायी नहीं है। परमात्मा की कृपा से प्राप्त होने वाली सभी उपलब्धियां नश्वर हैं और समय आने पर पुनः उसी परम सत्ता में विलीन हो जाती हैं।
कथाव्यास पंडित त्रिवेदी ने कहा कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर अपने सभी कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए सत्कर्मों में निरंतर संलग्न रहना चाहिए। विनम्रता, सेवा, परोपकार एवं भक्ति ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपनी सामर्थ्य, धन, पद अथवा उपलब्धियों का अभिमान न करें तथा सदैव परमात्मा के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। यही मानव जीवन की वास्तविक सफलता, सुख, शांति एवं कल्याण का मार्ग है।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में भागवत भक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा भक्ति भाव से कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

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