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बाँसवाड़ा - अरथुना के सारनपुर में पनघट योजना पर सवाल, लाखों खर्च फिर भी जनता परेशान!

अरथूना/बांसवाड़ा। बांसवाड़ा जिले के अरथूना क्षेत्र की ग्राम पंचायत सारनपुर में पनघट योजना को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से बनाए गए पनघटों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण आम लोगों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, योजना के तहत 5000 लीटर क्षमता की पानी की टंकी लगाए जाने का प्रावधान है, लेकिन कई स्थानों पर 3000 लीटर अथवा उससे कम क्षमता की टंकियां लगाई गई हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कुछ पनघट अभी भी बंद पड़े हैं, जिससे लोगों को पेयजल संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि एक पनघट के निर्माण पर लगभग 5 लाख रुपये तक की राशि खर्च की जाती है। इसके बावजूद यदि लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल रही है तो यह चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सारनपुर गांव का मामला नहीं है, बल्कि जिले के कई ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी पेयजल योजनाओं को लेकर इसी प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि कई गांवों में लोग आज भी पर्याप्त पेयजल सुविधाओं से वंचित हैं।

अधिकारियों का पक्ष

मामले की जानकारी लेने के लिए हमारे संवाददाता अब्दुल कमाल ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। ग्राम पंचायत सारनपुर के सचिव अनिल जोशी ने बताया कि मौके पर 5000 लीटर क्षमता की पानी की टंकियां लगी हुई हैं।

वहीं, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में पूछे जाने पर सचिव अनिल जोशी ने फोन पर कहा, "जो करना है करो।" बातचीत की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने का दावा किया गया है।

इसके अलावा एईएन राकेश परमार से भी संपर्क किया गया। उन्होंने सचिव से जानकारी लेकर विस्तृत जवाब देने की बात कही थी, लेकिन बाद में कई बार संपर्क करने के बावजूद उनसे बात नहीं हो सकी।

जनहित से जुड़ा मुद्दा

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में पेयजल सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ऐसे में यदि जमीनी स्तर पर लोगों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है तो इसकी जांच आवश्यक है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं, तो ग्रामीणों में असंतोष क्यों है? और यदि शिकायतों में सच्चाई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक किया जाए तथा जहां भी कमियां हों, उन्हें दूर किया जाए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच सके।

(नोट: यह समाचार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तस्वीरों एवं संबंधित अधिकारियों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। मामले की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।)

रिपोर्ट: अब्दुल कमाल, अरथूना
प्रकाशक: Official News Explainer By-Mustafa

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