"आसमान से बरसती मौत और हमारी सजगता का इम्तिहान"
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पटना : आसमान में गड़गड़ाहट और बिजली की कड़क देखने में जितनी विस्मयकारी लगती है, जमीन पर आकर यह उतनी ही क्रूर और जानलेवा साबित होती है।
हाल के वर्षों में 'वज्रपात' या 'ठनका' हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन के लिए एक मूक लेकिन सबसे बड़ा हत्यारा बनकर उभरा है।
ऐसे समय में, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी यह दिशानिर्देश महज कागजी चेतावनी नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच की विभाजक रेखा हैं।
इस गंभीर संकट पर तात्कालिक आत्ममंथन और कड़े एक्शन की जरूरत है।
क्या करें और क्या न करें:
जीवन रक्षक नियमावली,
दस्तावेज़ को मूल रूप से दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है—'क्या करें' और 'क्या न करें'। वज्रपात के समय घबराहट में अक्सर लोग वही गलतियाँ कर बैठते हैं जो उनके जीवन पर भारी पड़ जाती हैं।
1. सुरक्षित आश्रय की तलाश (कहाँ जाएं और कहाँ न जाएं)
पक्के मकान की शरण: यदि आप खुले आसमान के नीचे हैं, तो किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और यथाशीघ्र किसी पक्के मकान में शरण लें।
वाहनों का विवेकपूर्ण उपयोग:
यदि आप कार, बस या किसी पूरी तरह से ढके हुए वाहन के भीतर हैं, तो उसी के अंदर बने रहना सुरक्षित है।
इसके विपरीत, बिना छत वाले खुले वाहनों के नजदीक जाना मौत को बुलावा देने जैसा है।
जंगल और पेड़ों का गणित:
यदि आप जंगल में फंस गए हैं, तो किसी ऊंचे पेड़ के नीचे खड़े होने की भूल कतई न करें। सुरक्षा के लिहाज से बौने (छोटे) और घने पेड़ों की शरण में चले जाना ही बुद्धिमानी है।
2. इन घातक गलतियों से बचें (जो अक्सर अनजाने में होती हैं)
ऊंचाई से दूरी:
वज्रपात हमेशा सबसे ऊंचे बिंदु को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसलिए ऊंचे वृक्षों, गगनचुंबी इमारतों और टेलीफोन या बिजली के खंभों के पास खड़े होने की सख्त मनाही है।
घर के भीतर की सावधानियां:
हम अक्सर सोचते हैं कि घर के अंदर आ गए तो पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन यह हमारी गलतफहमी है। बिजली चमकने के दौरान खिड़की, दरवाजे, बरामदे या छत से पूरी तरह दूर रहें। घर के अंदर बिजली से संचालित सभी उपकरणों को तुरंत बंद कर दें और तार वाले (लैंडलाइन) टेलीफोन का उपयोग बिल्कुल न करें।
पानी और धातु से दूरी:
पानी और धातु बिजली के सबसे बेहतरीन सुचालक हैं। यदि आप तैर रहे हैं या पानी के भीतर/आसपास हैं, तो पुल, झील या छोटी नाव से तुरंत बाहर निकल जाएं। घर के भीतर भी प्लम्बिंग, लोहे के पाइपों को न छुएं और नल से बहते पानी का इस्तेमाल न करें।
कृषि कार्य में लगे लोग धातु से बने उपकरणों (हँसुआ, कुदाल, ट्रैक्टर आदि), धातु के पाइप, नल और फव्वारों से तुरंत दूरी बना लें।
भीड़ न लगाएं:
खुले मैदान में एक जगह पर भीड़ बनाकर खड़े होने से खतरा बढ़ जाता है; सभी को अलग-अलग दूरी बनाकर खड़ा होना चाहिए।
बिहार जैसे कृषि-प्रधान राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी खेतों में काम करती है, वज्रपात की आपदा का डंक सबसे गहरा होता है।
सरकार ने वर्ष 2026-27 के इस जागरूकता अभियान के जरिए अपनी तत्परता तो दिखाई है, लेकिन असली चुनौती इस सूचना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने और उनके व्यवहार में ढालने की है।
अक्सर किसान भाई बादलों की गड़गड़ाहट को नजरअंदाज कर खेतों में काम करते रहते हैं, जो आत्मघाती साबित होता है।
इस विज्ञापन का संदेश साफ है: सतर्कता ही एकमात्र सुरक्षा है। आपदा के समय तकनीकी उपकरणों का मोह छोड़ना और प्रकृति के नियमों को समझना ही हमें बचा सकता है।
आपातकालीन सहायता:
सिस्टम की मुस्तैदी,
यदि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटती है या आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होती है, तो प्रशासन ने निम्नलिखित हॉटलाइन नंबर जारी किए हैं, जिन्हें हर नागरिक को अपने मोबाइल में सहेज कर रखना चाहिए:
राज्य आपातकालीन संचालन केन्द्र (SEOC) दूरभाष: (01) 0612-2294204 / 205
टॉल फ्री नंबर: 1070
आपातकालीन नंबर: 112
मोबाइल नंबर: 7070290170
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पटना): +91 (0612) 2547232 (वेबसाइट: www.bsdma.org)
निष्कर्ष:
प्रकृति के इस रौद्र रूप के सामने मानव बेबस जरूर है, लेकिन लाचार नहीं।
आपदा प्रबंधन विभाग की इस चेतावनी को हल्के में न लें। याद रखें, आसमान में कड़कती बिजली को रोकने की ताकत हमारे पास नहीं है, लेकिन खुद को उससे सुरक्षित रखने की समझदारी पूरी तरह हमारे हाथ में है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!