1857 की क्रांति के महानायक अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह के विजय दिवस पर स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी को नमन
फतेहपुर, 8 जून।
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति में फतेहपुर जनपद का नाम गौरव के साथ लिया जाता है। इस गौरवशाली इतिहास के केंद्र में रहे महान क्रांतिकारी, वीर योद्धा और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह के विजय दिवस पर प्रत्येक वर्ष 8 जून को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। ठाकुर दरियाव सिंह ने उस दौर में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बिगुल फूंका, जब विदेशी सत्ता का भय आम जनमानस पर हावी था। उन्होंने न केवल क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया, बल्कि फतेहपुर की धरती को स्वतंत्रता की चेतना से भी ओत-प्रोत किया। उनके साहस, रणनीति और अदम्य पराक्रम के बल पर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी और जनपद में स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। 8 जून का दिन फतेहपुर के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह वह अवसर है जब वीर क्रांतिकारियों के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन को करारी चुनौती मिली और स्वतंत्रता के लिए जनसंघर्ष को नई ऊर्जा प्राप्त हुई। ठाकुर दरियाव सिंह ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना मातृभूमि की रक्षा और स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया, जिसके कारण उनका नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अंकित है।
आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा ले। ठाकुर दरियाव सिंह का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, साहस और स्वाभिमान का अनुपम उदाहरण है। उनका संघर्ष हमें यह संदेश देता है कि मातृभूमि की रक्षा और सम्मान के लिए किया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता। विजय दिवस के अवसर पर समस्त जनपदवासियों द्वारा 1857 की क्रांति के महानायक ठाकुर दरियाव सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय योगदान को स्मरण किया जा रहा है।
(श्रद्धांजलि संदेश)
"जिनके साहस से कांपा था अंग्रेजी साम्राज्य,
जिनके रणघोष से जागा था स्वाधीनता का समाज।
ऐसे वीर क्रांतिनायक ठाकुर दरियाव सिंह को,
विजय दिवस पर शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।"