"3,529 की पेंशन से अन्तर्राष्ट्रीय लेखक तक पूर्व सैनिक नरेश दास वैष्णव निम्बार्क बने वीर बंदा बैरागी शहीदी दिवस के मुख्य अतिथि"
310वाँ शहीदी दिवस — महायोद्धा वीर बंदा बैरागी
ग्राम लूम्ब, तहसील बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश)
7 जून 2026 | जय सीताराम | राधे-राधे
इतिहास, सम्मान और संस्कार का अद्भुत संगम
आज 7 जून 2026 को ग्राम लूम्ब की पावन धरती पर महायोद्धा वीर बंदा बैरागी जी का 310वाँ शहीदी दिवस अत्यन्त भव्यता, श्रद्धा और गौरव के साथ मनाया गया। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश एवं हरिद्वार (उत्तराखंड) से आए 700 से अधिक संतों, विद्वानों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन के प्रमुख सूत्रधार
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के प्रेरणास्रोत एवं प्रमुख सूत्रधार रहे — ठेकेदार सत्य प्रकाश वैष्णव जी, जिला प्रधान, बागपत। जिनके अथक परिश्रम, संगठन-क्षमता एवं समाज के प्रति निःस्वार्थ समर्पण ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन एडवोकेट रवि वैष्णव जी द्वारा किया गया।
इस लूम्ब की पावन धरा पर जो दीप जला — वह सत्य प्रकाश जी के संकल्प से जला।
धन्य है वह मिट्टी जिसने सत्य प्रकाश को जन्म दिया — धन्य है वह समाज जिसे ऐसा निःस्वार्थ सेवक मिला।
मुख्य अतिथि — नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे — भारतीय सेना के पूर्व नायब सूबेदार, अन्तर्राष्ट्रीय लेखक एवं शोधकर्ता नरेश दास वैष्णव निम्बार्क। उन्होंने वीर बंदा बैरागी के जीवन, तपस्या एवं युद्ध-अभियानों पर विस्तृत उद्बोधन दिया। मंच पर पूर्व विधायक सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित थे — किन्तु समाज की जिज्ञासा उस व्यक्ति को सुनने की थी जो सीमा से लौटकर समाज की जड़ों को खोज रहा है।
एक साधारण किसान परिवार से निकलकर भारतीय सेना में 24 वर्षों तक राष्ट्र सेवा करने वाले नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की Amazon पर 11, Google Books पर 13 और Notion Press पर 5 पुस्तकें उपलब्ध हैं। जब 2008 में सेवानिवृत्त हुए तो पेंशन मात्र 3,529 रुपये मासिक थी — आज वे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले लेखक एवं शोधकर्ता हैं।
महायोद्धा वीर बंदा बैरागी — संक्षिप्त जीवन परिचय
महायोद्धा वीर बंदा बैरागी जी का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को ग्राम तक्षक किला, जिला पुंछ में हुआ था। बचपन का नाम लक्ष्मण भारद्वाज था। रामथमन जी के 52 द्वारों में से एक पर वैष्णव बैरागी दीक्षा ग्रहण की — यह द्वारा आज पाकिस्तान में ददन खान क्षेत्र में स्थित है। गुरुजी ने उनका नाम माधव दास बैरागी रखा। नासिक और नांदेड़ में तपस्या के पश्चात् श्री गुरु गोविन्द सिंह जी से ऐतिहासिक भेंट ने उन्हें राष्ट्र और धर्म रक्षा के महान अभियान का सेनानी बना दिया।
प्रमुख युद्ध-अभियान
3 नवम्बर 1709 — सोनीपत विजय: मुगलों की कोषागार लूटी और उनके अजेय होने के भ्रम को सदा के लिए समाप्त किया।
12 मई 1710 — सरहिंद का महायुद्ध: नवाब वज़ीर खान को एक ही तलवार के प्रहार से वध किया — यही वह नवाब था जिसने गुरु गोविन्द सिंह जी के दोनों पुत्रों को जीवित दीवार में चिनवाया था।
14 मई 1710 — भूमि क्रान्ति: सरहिंद की धरती से जमींदारी प्रथा का उन्मूलन। 'जो जमीन जोते — वही उसका मालिक।' भारतीय इतिहास का पहला भूमि-सुधार।
9 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण
इस पावन अवसर पर नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की निम्नलिखित 9 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ —
1. Jagatguru Nimbarkacharyaji: Sanatan Ke Surya
2. रामनगर: 422 वर्षों का अनसुना इतिहास
3. Ramnagar: 422 Years of Untold History
4. यात्रा बन्दूक से कलम तक
5. महन्त बने महाराजा
6. Nimbark Sampraday: Sanatan Vaishnav Bairagi Tradition
7. Sanatan Vaishnav Bairagi: Forgotten Warriors and Soldiers
8. Jagatguru Nimbarkacharya (Notion Press)
9. VBK Preview — Nimbark Bairagi Raja
शीघ्र प्रकाश्य — 12वीं पुस्तक: महायोद्धा वीर बंदा बैरागी — 356 वर्षों का अनसुना इतिहास। यह पुस्तक जन्मस्थली से लेकर छपरचिड़ी और लोहगढ़ तक किए गए प्रत्यक्ष क्षेत्रीय अध्ययन पर आधारित है। लूम्ब की पुण्यभूमि से इस पुस्तक की घोषणा की गई।
मेधावी बच्चों का सम्मान
वैष्णव बैरागी समाज के उन सैकड़ों मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया जिन्होंने 80% से अधिक अंक प्राप्त किए। मुख्य अतिथि ने गुरुदक्षिणा स्वरूप लगभग 31,000 रुपये मूल्य की 210 पुस्तकें निःशुल्क भेंट कीं।
शिक्षा आपको नौकरी दिला सकती है — किन्तु संस्कार के बिना वह नौकरी भी किसी काम की नहीं। अपने माता-पिता को कभी न भूलें जिन्होंने अपनी कठिन कमाई से आपको इस मुकाम तक पहुँचाया।
हृदय की बात — मुख्य अतिथि के शब्दों में
मैं एक साधारण किसान परिवार में जन्मा वैष्णव बैरागी और पूर्व सैनिक हूँ। जब सेवानिवृत्त हुआ तो पेंशन मात्र 3,529 रुपये थी। आज समाज जिस सम्मान से मुझे मंचों पर बुला रहा है — वह मेरा नहीं, पूरे वैष्णव बैरागी समाज का सम्मान है। परमात्मा से यही दुआ है — हे प्रभु! इतना धन मत देना कि मैं तुम्हें ही भूल जाऊँ। मेरे जीवन के ये क्षण सदैव स्मरणीय रहेंगे।
संगठन के पदाधिकारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष: नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
राष्ट्रीय महासचिव: मास्टर जगबीर वैष्णव
राष्ट्रीय सलाहकार: ब्रह्मपाल वैष्णव
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: देव टिलावत
किसान विंग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: तुलसी बैरागी
मंच संचालक: एडवोकेट रवि वैष्णव
परिवार का अमूल्य सहयोग
इस सम्पूर्ण शोध-यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने वाले — श्रीमती निर्मला वैष्णव (धर्मपत्नी), पौत्र भावेश स्वामी तथा पुत्र अमित स्वामी एवं सुमित स्वामी। इनके निःस्वार्थ सहयोग के बिना यह यात्रा सम्भव न होती।
जय वीर बंदा बैरागी | जय श्री सीताराम | जय हिन्द | जय भारत
नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
पूर्व नायब सूबेदार, भारतीय सेना | अन्तर्राष्ट्रीय लेखक एवं शोधकर्ता
www.nareshswaminimbark.in