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करोड़ों का बजट फिर भी प्यासे ग्रामीण: कालाकांकर के काशीपुर में 'जल जीवन मिशन' पूरी तरह फेल, उठ रहे सवाल!

मामला प्रतापगढ़ जिले के विकासखंड कालाकांकर के काशीपुर ग्राम सभा का है। सरकार ने इस पूरे इलाके की प्यास बुझाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत करीब 27,410 लाख (274 करोड़ से अधिक) रुपयों का भारी-भरकम बजट पास किया था। इस योजना के तहत काम को साल 2024 में ही पूरा हो जाना चाहिए था।

लेकिन आज साल 2026 चल रहा है, और धरातल पर काम जस का तस अधूरा पड़ा है। दो साल का वक्त बीत जाने के बाद भी काशीपुर ग्राम सभा के लोग पानी की एक-एक बूंद को मोहताज हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस भारी-भरकम बजट में योजना के 10 साल का रखरखाव (Maintenance) भी शामिल था। लेकिन जहां योजना की शुरुआत ही नहीं हो पाई, वहां रखरखाव की बात तो कोसों दूर है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नमामि गंगे और जल जीवन मिशन के तहत हो रहा यह कार्य धरातल पर पूरी तरह से फेल हो चुका है। जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर इस महाघोटाले की जांच कब होगी? कौन करेगा इसकी जांच? या फिर सब 'बंदरबांट' के चक्कर में पड़कर इस मामले को दबाने में जुटे हैं?

​करोड़ों रुपए पास होने के बाद भी ठेकेदारों की ढीली कार्यशैली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकार की इस जनहितैषी योजना को पलीता लगाया जा रहा है।
काशीपुर ग्राम सभा की यह तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि कागजों पर दौड़ने वाली योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो उन्हें भ्रष्टाचार के दीमक किस तरह चाट जाते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या प्रतापगढ़ प्रशासन और जल शक्ति मंत्रालय की नींद टूटती है? क्या दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई होगी? या फिर काशीपुर की जनता ऐसे ही बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती रहेगी।
​[वन्दे भारत] के लिए कुंडा, प्रतापगढ़ से ब्यूरो रिपोर्ट।

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