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जंतर-मंतर पर छात्रों का उबाल: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, CJP के प्रदर्शन ने खींचा देश का ध्यान


📰 AIMA MEDIA | विशेष रिपोर्ट

जंतर-मंतर पर छात्रों का उबाल: शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, CJP के प्रदर्शन ने खींचा देश का ध्यान

नई दिल्ली, 6 जून 2026।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। "कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)" के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में खामियां और डिजिटल मूल्यांकन विवादों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है।

प्रदर्शन की प्रमुख मांगें

- NEET-UG 2026 में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की समीक्षा।
- CUET और SSC जैसी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग।
- परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के लिए ठोस नीति।

अनोखा प्रदर्शन बना चर्चा का विषय

प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने कॉकरोच मास्क पहनकर विरोध दर्ज कराया। हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था:

"हमने मांगा था मेक इन इंडिया, आपने दिया लीक इन इंडिया।"

आयोजकों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने की अपील की और प्रतिभागियों से तिरंगा तथा पुस्तक लेकर आने का आग्रह किया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर तनाव की स्थिति बनने की खबरें सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया।

पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस आंदोलन ने राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।

प्रदर्शनकारियों का पक्ष

छात्रों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों के कारण मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

सरकार और आलोचकों का पक्ष

दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन छात्रों को लंबी राजनीतिक गतिविधियों में उलझने के बजाय अपनी तैयारी पर भी ध्यान देना चाहिए। कुछ लोगों ने इस आंदोलन के राजनीतिकरण की आशंका भी जताई है।

जनमत क्या कहता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद ने तीन बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—

1. क्या भारत की परीक्षा प्रणाली को बड़े सुधारों की जरूरत है?
2. क्या पेपर लीक और तकनीकी खामियों पर कठोर जवाबदेही तय होनी चाहिए?
3. क्या छात्रों की आवाज नीति निर्माण तक प्रभावी ढंग से पहुंच रही है?

निष्कर्ष

जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन केवल एक संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों की चिंताओं का प्रतीक बनकर उभरा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार, शिक्षा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं।
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✍️ रिपोर्ट: सुजीत शुक्ला
News Editor | AIMA MEDIA
📞 9990848881

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