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पंजाब में फ्री बिजली, फ्री पानी, राशन, बस टिकट जैसी स्कीमों ने एक बड़े तबके को पॉलिटिकल तौर पर खरीद लिया है।

शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन के एडवाइजर हरबंस सिंह ने पत्रकारों से अपनी बात शेयर करते हुए कहा कि इन लोगों पर इकोनॉमिक डेवलपमेंट, इंडस्ट्रियलाइजेशन, एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन, एग्रीकल्चर का मॉडर्नाइजेशन या फेडरल स्ट्रक्चर जैसे लॉन्ग-टर्म इश्यूज का बहुत कम असर होता है। उनके लिए तुरंत फायदा ही मेन चीज है। इससे सरकारी खजाना खाली हो रहा है, कर्ज बढ़ रहा है और इन्वेस्टमेंट रुक रहा है। यह तबका अपनी मांगों (जॉब्स) के लिए सड़कों पर आता है, लेकिन इनकी संख्या कम है और वोट बैंक के तौर पर यह उनके लिए बहुत इंपॉर्टेंट नहीं है। ये फ्यूचर का टैक्स देने वाला तबका है, लेकिन अभी प्रोटेस्ट करने पर इन्हें “नुकसानदायक” माना जाता है। यह साइकिल बहुत खतरनाक है। आज जो लोग पिट रहे हैं, वही टैक्स देंगे, और उस टैक्स से फ्री-राइडिंग बढ़ेगी। जब अपोजिशन पावर में होता है, तो बेरोज़गारों पर पुलिस एक्शन को “रेवोल्यूशनरी” और “एंटी-पीपल” कहा जाता है। जब इनकी अपनी सरकार पावर में आती है, तो चुप्पी साध ली जाती है। यह बात सभी पार्टियों (AAP, कांग्रेस, अकाली, BJP) में आम है, लेकिन हद अलग-अलग है। भगत सिंह या गांधी का नाम लेकर इमोशनल पॉलिटिक्स करना आसान है, लेकिन आर्थिक सच्चाई से निपटना मुश्किल है। वोटर्स को लंबी-चौड़ी पॉलिसी (डेवलपमेंट, इंडस्ट्री, खेती में सुधार) के लिए वोट करना होगा, सिर्फ़ तुरंत फ़ायदे के लिए नहीं। पार्टियों को लोगों को यह सच बताना होगा कि मुफ़्तखोरी टिकाऊ नहीं है। बेरोज़गार युवाओं को भी अपने संघर्ष में ज़्यादा स्ट्रेटेजिक और एकजुट होना होगा, न कि सिर्फ़ नारे लगाने तक सीमित रहना होगा। यह एक तरफ़ से बहुत कठोर लगता है, लेकिन इसमें बहुत सच्चाई है। पंजाब को इमोशनल पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर आर्थिक सच्चाई को देखना होगा, नहीं तो जो चीज़ कुएं में गिर रही है, वह जारी रहेगी। ✍🏿हरबंस सिंह, सलाहकार शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब पोबिल-+91-8054400953

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