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शासकीय नाप के बाद प्रशासन पर झूठे आरोप लगाए गए

तुरकिया बिलासपुर, उत्तर प्रदेश। शासकीय नाप के बाद विरोधी पक्ष ने अपनी ही जमीन पर चक्रवात मार्ग निकलने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाए हैं। इस विवाद में स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। विरोधी पक्ष के बौखलाए रुख के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। इस मामले में कोई भी नामित व्यक्ति या अधिकारी अभी तक सामने नहीं आया है। प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। उत्तर प्रदेश के तुरकिया बिलासपुर से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में जमीन की नापी के दौरान हंगामा देखने को मिला। पूरा मामला तब गरमा गया जब राजस्व विभाग की टीम, पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों की देखरेख में मौके पर मार्ग (चक्रवात) की सरकारी नाप करने पहुंची। जब तक पैमाइश चल रही थी, तब तक सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही नाप पूरी हुई और दूध का दूध, पानी का पानी हुआ, तो शिकायतकर्ता और विरोधियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकारी पैमाइश में यह साफ हो गया कि जिसे वो विवादित बता रहे थे, वह चक्रवात (रास्ता) खुद शिकायतकर्ता के अपने ही खेत के हिस्से में निकल आया। अपनी ही ज़मीन पर रास्ता निकलता देख विरोधी पक्ष पूरी तरह बौखला गया। अपनी गलती और अवैध कब्जे की पोल खुलती देख, उन्होंने प्रशासन पर ही दबाव बनाने की नाकाम कोशिश शुरू कर दी। बौखलाहट में आकर विरोधी पक्ष अब अपनी हार को छुपाने के लिए राजस्व विभाग और उप-जिलाधिकारी (SDM) सहित पूरी प्रशासनिक टीम पर मनगढ़ंत और झूठे आरोप लगाने पर उतारू हो गया है। तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि मौके पर भारी पुलिस बल और अधिकारी मौजूद हैं और ट्रैक्टर के जरिए पैमाइश की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है। किसी के भी झूठे आरोपों या दबाव में आकर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रुकेगी। इस मामले पर आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। इस पूरी घटना पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके बताएं।

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