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बीजापुर में नई ई-टोकन प्रणाली से रासायनिक उर्वरक वितरण

**रासायनिक उर्वरक वितरण हेतु नई ई-टोकन आधारित प्रणाली: बीजापुर बना पायलट जिला**

**बीजापुर, 06 जून 2026।**
भारत सरकार के उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय तथा संचालनालय उर्वरक, नई दिल्ली द्वारा “फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS)” के अंतर्गत बीजापुर जिले को पायलट जिला के रूप में चयनित किया गया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराना है।

इस प्रणाली के लागू होने से किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली कठिनाइयों में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही समय की बचत, श्रम की बचत तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। यह पूरी व्यवस्था मोबाइल आधारित होगी, जिसमें आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से सुरक्षित और आसान सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही किसान अपने परिवार के सदस्य को भी उर्वरक प्राप्त करने हेतु अधिकृत कर सकेंगे।

नई ई-टोकन प्रणाली के तहत किसान उस अधिकृत विक्रेता का चयन कर सकेंगे, जहां आवश्यक उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध होगा। चयन के बाद सिस्टम द्वारा एक क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा, जो तीन दिनों तक वैध रहेगा। यदि किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर उर्वरक प्राप्त नहीं करता है, तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा।

इस प्रणाली का लाभ वे सभी किसान उठा सकेंगे जिनके पास फार्मर आईडी उपलब्ध है। ऐसे किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सरलता से आवेदन कर सकेंगे। वहीं जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे अपने आधार नंबर एवं भूमि विवरण दर्ज कर आवेदन कर सकते हैं।

प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में किसान लोक सेवा केंद्रों, सहकारी समितियों, निजी विक्रेताओं अथवा स्वयं अपने मोबाइल से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के दौरान आधार सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद किसान अपनी फसल का चयन करेगा और उपलब्ध स्टॉक वाले उर्वरक विक्रेता का चुनाव करेगा।

इसके उपरांत सिस्टम द्वारा जनरेट किया गया क्यूआर कोड संबंधित विक्रेता के पास प्रस्तुत किया जाएगा। विक्रेता इस कोड को पॉस मशीन से स्कैन कर सकता है या टोकन नंबर दर्ज कर सकता है। इसके अतिरिक्त बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से भी उर्वरक वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

यह पूरी प्रक्रिया न केवल उर्वरक वितरण प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि किसानों को अनावश्यक कतारों और देरी से भी राहत प्रदान करेगी। बीजापुर जिले में इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के बाद इसे अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।

इस नई व्यवस्था को कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में उर्वरक वितरण प्रणाली को अधिक सुदृढ़, प्रभावी और किसान हितैषी बनाएगी।

संवाददाता प्रेम कुमार दुर्गम

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