सच पर चलने से शांति तो मिलती है, लेकिन कई लोग दुश्मन बन जाते हैं।
यह ज़िंदगी का एक कड़वा लेकिन सबसे बड़ा सच है। सच के रास्ते पर चलना ठीक वैसा ही है जैसे नंगे पैर अंगारों पर चलना, इससे खुद को तकलीफ़ होती है, लेकिन आत्मा पवित्र रहती है। सच का रास्ता: मन की शांति बनाम बाहरी विरोध यह एक अजीब विडंबना है कि दुनिया सच की तारीफ़ करती है, लेकिन जब वही सच उनके सामने आता है, तो वे उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते। लोगों के दुश्मन बनने के कुछ मुख्य कारण ये हैं: आईने का डर: सच आईने की तरह होता है। जब आप सच बोलते हैं या उस पर अमल करते हैं, तो लोग आपका असली (और अक्सर झूठा) चेहरा देखने लगते हैं, जो उन्हें पसंद नहीं आता। ईगो को चोट: आज की दुनिया दिखावे और चापलूसी पर चल रही है। जब कोई सच्चा इंसान दिखावे का हिस्सा बनने से मना कर देता है, तो दूसरों के ईगो को चोट पहुँचती है। मतलबीपन में रुकावट: सच अक्सर गलत काम और मतलबीपन के रास्ते में दीवार बनकर खड़ा हो जाता है। इसलिए, जिनके हितों को नुकसान पहुँचता है, वे दुश्मन बन जाते हैं। "सच्चाई से मिलने वाला एकांत और मन की शांति दुनिया के हज़ार झूठे रिश्तों और तारीफ़ों से हज़ार गुना बेहतर है।" जब आप सच का साथ देते हैं, तो बाहर तूफ़ान आने पर भी आपके अंदर एक अजीब सी शांति रहती है। आपको किसी चीज़ का डर नहीं रहता, और न ही झूठ छिपाने के लिए आपको दस और झूठ बोलने पड़ते हैं। सच्चे बनकर बने दुश्मन दिखावटी दोस्तों से बेहतर होते हैं, क्योंकि कम से कम वे असली तो होते हैं। ✍🏿हरबंस सिंह, सलाहकार शहीद भगत सिंह प्रेस एसोसिएशन पंजाब पोब्याल: -+91-8054400953