खरसावां का 500 बेड अस्पताल अधूरा, फिर रिम्स-2 के लिए जमीन अधिग्रहण पर क्यों जोर?
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के आमदा क्षेत्र में बन रहा 500 बेड का मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल वर्षों से अधूरा पड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस अस्पताल से कोल्हान क्षेत्र के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती थीं, उसका निर्माण कार्य एक दशक से अधिक समय से पूरा नहीं हो सका। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया है और अस्पताल को शीघ्र चालू करने की मांग लगातार की जाती रही है।
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पूर्व में अस्पताल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की समीक्षा और उसे पुनर्जीवित करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी परियोजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। रिपोर्टों के अनुसार यह अस्पताल करीब 154 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है और लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है।
रिम्स-2 को लेकर बढ़ा विवाद
इधर रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कई आदिवासी संगठनों, ग्रामीणों और राजनीतिक नेताओं का आरोप है कि सरकार रिम्स-2 के लिए जमीन अधिग्रहण की दिशा में तेजी दिखा रही है, जबकि पहले से अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाओं को पूरा करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन समेत कई नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब पहले से अधिग्रहित बड़ी मात्रा में जमीन और अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाएं मौजूद हैं, तो नई जमीन लेने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर आदिवासी जमीनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और विस्थापन की आशंका लोगों की चिंता का कारण बनी हुई है।
जनता पूछ रही है ये सवाल
खरसावां का 500 बेड अस्पताल आखिर कब पूरा होगा?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना अधूरी क्यों है?
क्या पहले से लंबित अस्पतालों को चालू करना सरकार की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
रिम्स-2 के लिए नई जमीन लेने से पहले अधूरी स्वास्थ्य परियोजनाओं का हिसाब कौन देगा?
आदिवासी जमीनों के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा?
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
रिम्स-2 परियोजना को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक पक्ष इसे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे आदिवासी भूमि अधिकारों और विस्थापन से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहा है।
निष्कर्ष
खरसावां का वर्षों से अधूरा पड़ा 500 बेड अस्पताल झारखंड की स्वास्थ्य परियोजनाओं की धीमी गति पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे में रिम्स-2 के लिए नई जमीन अधिग्रहण की पहल को लेकर लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठ रहे हैं। सरकार के सामने चुनौती केवल नए प्रोजेक्ट शुरू करने की नहीं, बल्कि अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर जनता का विश्वास जीतने की भी है।
"क्या सरकार को पहले खरसावां के अधूरे 500 बेड अस्पताल को पूरा करना चाहिए या रिम्स-2 के लिए नई जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए? अपनी राय हमें जरूर भेजें।"