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: ब्यूरोक्रेसी और सिंडिकेट का नापाक गठजोड़ 'स्पीड मनी' के जाल में फंसी सुशासन की साख"

:

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​पटना: ​विशेष विजिलेंस यूनिट (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

​इस घोटाले के मुख्य किरदार और उन पर लगे साक्ष्य इस प्रकार हैं:
​रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री (मुख्य ठेकेदार): टेंडर सिंडिकेट का मास्टरमाइंड, जिसे गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेज दिया गया है।
उसके ठिकानों से 2 करोड़ के जेवरात और नकदी जब्त की गई है।

​IAS योगेश कुमार सागर (2017 बैच):
आरोप है कि तत्कालीन बुडको पदस्थापना के दौरान इन्होंने ठेकेदार के खर्चे पर जून 2024 में अपने परिवार के 8 सदस्यों के साथ यूरोप (ऑस्ट्रिया के विएना, सॉल्जवर्ग) की लग्जरी यात्रा की। इस 22 लाख के ट्रिप का पूरा भुगतान रिशु श्री ने किया था। (अब निलंबित)

​IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा (2014 बैच): आरोप है कि तत्कालीन जीविका पदस्थापना के दौरान इनके सरकारी आवास की छत पर ठेकेदार के पैसे से 9 लाख का आलीशान रूफटॉप गार्डन बनवाया गया। इसके अलावा उनके रिश्तेदारों को गोवा, दिल्ली की हवाई यात्राएं और महंगे आईफोन गिफ्ट किए गए।

​2. विश्लेषण: '
लक्ज़री लाइफस्टाइल' और प्रशासनिक पतन,
​यह घोटाला केवल कुछ लाख रुपयों की रिश्वत का पारंपरिक मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जैसी गरिमामयी व्यवस्था के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।
सिविल सेवा परीक्षा पास कर राज्य की नीति और विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले ये युवा अधिकारी एक रसूखदार ठेकेदार के हाथों की कठपुतली बन गए।
​जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट के भीतर 8% से 10% का एक फिक्स्ड कमीशन नेटवर्क काम कर रहा था, जिसे फाइलें तेजी से आगे बढ़ाने के लिए 'स्पीड मनी' का नाम दिया गया था।
ठेकेदार रिशु श्री ने कैश के बजाय अधिकारियों को 'हाई-एंड लाइफस्टाइल' और विदेशों की सैर कराकर उनकी वफादारी खरीदी।
जब जनता के टैक्स के पैसे से राज्य का बुनियादी ढांचा तैयार होना था, तब ये अधिकारी विदेशी वादियों और रूफटॉप गार्डनों में सुशासन का मखौल उड़ा रहे थे।
​3. जांच का बढ़ता दायरा:
क्या यह केवल शुरुआत है?
​विजिलेंस (SVU) ने इस मामले में रिशु श्री के बेहद करीबी सहयोगी और फाइनेंसर संतोष (मातोश्री निदेशक) को भी गिरफ्तार कर लिया है।
रिशु श्री द्वारा महज 16 महीनों के भीतर 12 बार विदेश यात्राएं करना यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार की यह रकम केवल उपहारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क सक्रिय है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में लगभग एक दर्जन अन्य आईएएस अधिकारी और सीनियर इंजीनियर भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

​4. निष्कर्ष और सुधारात्मक विमर्श
​बिहार सरकार द्वारा किया गया निलंबन एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यह इस व्यवस्थागत बीमारी का स्थायी इलाज नहीं है।
जब तक सिस्टम में निम्नलिखित सुधार नहीं किए जाते, तब तक ऐसे 'रिशु श्री' और भ्रष्ट अधिकारी पैदा होते रहेंगे:
​टेंडर प्रक्रिया का पूर्ण डिजिटलीकरण:
इंसानी हस्तक्षेप और 'स्पीड मनी' की गुंजाइश को खत्म करने के लिए एआई (AI) आधारित पारदर्शी ई-टेंडरिंग व्यवस्था अनिवार्य की जाए।

​फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा:
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी कर मिसाल कायम करने वाली सजा दी जाए।

​संपत्ति की जब्ती:
भ्रष्टाचार से अर्जित की गई बेनामी संपत्तियों और लग्जरी एसेट्स को तुरंत कुर्क कर सरकारी खजाने में जमा किया जाए।

​ टिप्पणी:
यह मामला बिहार की ब्यूरोक्रेसी के लिए एक 'वेक-अप कॉल' (चेतावनी) है। यदि समय रहते इस सिंडिकेट को जड़ से नहीं उखाड़ा गया, तो जनता का सरकारी तंत्र और सुशासन के दावों से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

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