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सिर्फ रस्म नहीं, 'सांसों का संकल्प' है वृक्षारोपण,



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​शेरघाटी (गया)। हर साल 5 जून को जब 'विश्व पर्यावरण दिवस' आता है, तो वैश्विक मंचों से लेकर स्थानीय स्तर तक पर्यावरण को बचाने की बातें होती हैं।
लेकिन पर्यावरण संरक्षण केवल बंद कमरों की बहसों या सोशल मीडिया के पोस्ट तक सीमित नहीं रह सकता; इसकी असली सार्थकता तब सिद्ध होती है जब समाज की ज़मीनी ताकतें मिट्टी से जुड़कर काम करती हैं।

​इसी कड़ी में, शेरघाटी के ऐतिहासिक श्री राम मंदिर सूर्यनारायण घाट पर भारतीय जनता पार्टी (गयाजी पश्चिम) द्वारा आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम राजनीति से परे एक सकारात्मक सामाजिक संदेश देता है।

जिला अध्यक्ष प्रेम प्रकाश उर्फ चिंटू सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि नेतृत्व जब खुद फावड़ा और पौधा थामकर आगे बढ़ता है, तो जनता में एक नया विश्वास जगता है।

​धार्मिक चेतना और प्रकृति का अनूठा संगम,
​इस पूरे कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत बात इसका स्थान चयन रही।
श्री राम मंदिर सूर्यनारायण घाट पर वृक्षारोपण करना हमारी सनातनी परंपरा और 'प्रकृति पूजन' की संस्कृति को सीधे तौर पर जोड़ता है।
नदियां, घाट और मंदिर परिसर हमेशा से भारतीय समाज में शुद्धता और जीवन के प्रतीक रहे हैं। ऐसे पावन स्थल पर पौधे लगाकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने न केवल हरियाली बढ़ाने का काम किया है, बल्कि घाट की सुंदरता और पर्यावरण संतुलन को भी एक नया जीवन दिया है।

​"प्रकृति हमारी उतनी ही ज़रूरत है जितनी कि हमारी संस्कृति। पौधों को रोपना केवल ज़मीन को हरा-भरा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन सुरक्षित करना है।"

​संगठन की एकजुटता और 'हरियाली' का संदेश
​एक नेतृत्वकर्ता के रूप में चिंटू सिंह के साथ पूरी टीम की सक्रियता सराहनीय रही।
कार्यक्रम में महामंत्री कुशल वर्मा, मंत्री अरुण चंद्रवंशी, अशोक कुमार सिंह और मीडिया प्रभारी विनय प्रसाद सहित मुकेश पाठक, राजीव गोयल, बड़कू अग्रवाल, विनय रजक, पिंकू कुमार, अजय विश्वकर्मा जैसे स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इसे एक 'जनांदोलन' का रूप दिया।
राजनीति में अक्सर रैलियों और सभाओं को महत्व दिया जाता है, लेकिन जब कोई संगठन पर्यावरण जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट होता है, तो वह समाज को एक बेहतर दिशा दिखाता है।

​वक्त की मांग:
'लगाना' जितना ज़रूरी, 'बचाना' उससे ज़्यादा,
​इस कार्यक्रम के माध्यम से जिले भर के लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की गई।
आज पूरा देश और विशेषकर बिहार का यह क्षेत्र भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में इस अपील की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

​हालाँकि, इस संपादकीय के माध्यम से हमें एक कड़वी हकीकत को भी स्वीकार करना होगा—हम अक्सर पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं।
शेरघाटी के इस पावन घाट पर जो पौधे आज रोपे गए हैं, उन्हें एक बड़े पेड़ में तब्दील होने तक संरक्षण की ज़रूरत होगी। उम्मीद है कि भाजपा की यह ऊर्जावान टीम इन पौधों को पानी देने और उनके जीवित रहने की दर को सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी भी उतनी ही शिद्दत से निभाएगी, जितनी शिद्दत से उन्होंने इसे रोपा है।

​अंतिम निष्कर्ष:
​शेरघाटी का यह वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं, बल्कि 'सांसों के संकट' से जूझती इस धरती को बचाने का एक ईमानदार संकल्प बनना चाहिए।
प्रेम प्रकाश उर्फ चिंटू सिंह और उनकी पूरी टीम का यह प्रयास सराहनीय है और अन्य सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम सिर्फ एक पौधा न लगाएं, बल्कि शेरघाटी की इस मुहिम से प्रेरणा लेकर अपने आसपास की प्रकृति को बचाने का अटूट संकल्प लें।

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