व्यवस्था से उलझने का खामियाजा? सरहद लांघकर अवैध खनन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करने वाले SDO को चकराता DFO का नोटिस, मांगा जवाब
अवैध खनन के सिंडिकेट पर चोट करना एक जांबाज अधिकारी को भारी पड़ता नजर आ रहा है। इसे विभागीय अनुशासन कहें या फिर व्यवस्था से उलझने का खामियाजा, लेकिन सच यही है कि सरहद लांघकर अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) खुद ही विभागीय जांच के घेरे में आ गए हैं। चकराता वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) वैभव कुमार सिंह ने इस तथाकथित 'अति-सक्रियता' को अपने अधिकार क्षेत्र में सीधी दखलअंदाजी मानते हुए कालसी प्रभाग को बेहद तल्ख लहजे में पत्र जारी किया है, जिससे वन महकमे के भीतर की प्रशासनिक खींचतान खुलकर चौराहे पर आ गई है।
पूरा माजरा सरकारी फाइलों के उस मकड़जाल से जुड़ा है जहां नियमों की आड़ में अक्सर जमीनी हकीकत को दबा दिया जाता है।
दरअसल, कालसी प्रभाग के SDO ने बीते दिनों चकराता वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले नवाघाट पुल और आस-पास के इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे खनन पट्टों का औचक निरीक्षण किया था। इस जमीनी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप तो मचा, लेकिन चकराता वन प्रभाग को यह साहसिक कदम नागवार गुजरा।
चकराता DFO ने इसे प्रोटोकॉल और क्षेत्राधिकार का खुला उल्लंघन करार देते हुए दोटूक कहा है कि बिना स्थानीय प्रभाग को भरोसे में लिए की गई यह रेड नियमों के पूरी तरह विपरीत है। इस 'दुस्साहस' के लिए अब संबंधित SDO से अलग से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया जा रहा है।
इस पूरी प्रशासनिक जंग को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए बकायदा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उन आदेशों का हवाला दिया गया है, जो आसन वेटलैंड संरक्षण रिजर्व के १० किलोमीटर के दायरे में बिना सक्षम अनुमति (NBWL और MoEF&CC) के किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हैं। पत्र में प्रमुख वन संरक्षक के पुराने दिशा-निर्देशों की दुहाई देते हुए साफ कर दिया गया है कि जहां इको सेंसिटिव जोन अंतिम रूप से अधिसूचित नहीं है, वहां केवल संबंधित क्षेत्रीय प्रभाग ही कार्रवाई के लिए अधिकृत है।
इस कड़े पत्र ने वन विभाग के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चर्चाएं आम हैं कि क्या यह कार्रवाई महज एक तकनीकी और प्रशासनिक नोटिस है, या फिर व्यवस्था की उस स्थापित परिपाटी का हिस्सा है जो अपने ही महकमे के किसी अफसर को 'सिस्टम से उलझने' पर उसकी औकात और दायरा याद दिला देती है। चकराता प्रभाग ने साफ लहजे में चेतावनी दे दी है कि भविष्य में ऐसी किसी भी 'सरहद पार' कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि कोई रेड अनिवार्य है तो वह केवल संयुक्त रूप से होगी। बहरहाल, इस पत्र की कॉपियां वन संरक्षक (यमुना वृत्त) और जिला खनन अधिकारी देहरादून को भी भेज दी गई हैं, जिससे साफ है कि यह प्रशासनिक रार अब आसानी से थमने वाली नहीं है।