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विश्व पर्यावरण दिवस पर जलवायु अनुकूल कृषि एवं विभागीय समन्वय कार्यशाला आयोजित प्रकृति से जुड़ें, जल बचाएं और टिकाऊ खेती अपनाएं का दिया गया संदेश शुक

विश्व पर्यावरण दिवस पर जलवायु अनुकूल कृषि एवं विभागीय समन्वय कार्यशाला आयोजित

“प्रकृति से जुड़ें, जल बचाएं और टिकाऊ खेती अपनाएं” का दिया गया संदेश

शुक्रवार, 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दीदी सदन, पीटीसी परिसर, रायगढ़ में एचडीएफसी बैंक परिवर्तन वाटर परियोजना के अंतर्गत प्रदान (पीआरएडीएएन) द्वारा किसानों के लिए जलवायु अनुकूल कृषि एवं विभागीय समन्वय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, जलवायु सहनशील कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सिंचाई क्षेत्र के विस्तार एवं फसल सघनता बढ़ाने हेतु मांग उत्पन्न करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वागत के साथ किया गया। इसके पश्चात प्रदान टीम द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट तथा कृषि पर पड़ रहे प्रभावों की जानकारी साझा की गई। साथ ही जलवायु अनुकूल एवं संसाधन संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में लगभग 220 से 225 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, महिला किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के प्रतिनिधि, एफपीओ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ब्लॉक स्तरीय महासंघ (बीएलएफ) के प्रतिनिधि तथा विभिन्न किसान समूहों के सदस्य शामिल थे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। बीज निगम द्वारा गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता, आवश्यक दस्तावेजों तथा बीज उत्पादक किसान पंजीयन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। बीज प्रमाणीकरण विभाग ने प्रमाणित बीजों की पहचान एवं उनके लाभों के बारे में बताया।

फसल बीमा विभाग द्वारा खरीफ मौसम हेतु फसल बीमा योजना के पंजीयन की अवधि 15 जून से 31 जुलाई तक होने की जानकारी देते हुए किसानों से समय पर पंजीयन कराने का आग्रह किया गया। मनरेगा विभाग ने “मोर गांव मोर पानी” अभियान, जल संरक्षण, वृक्षारोपण एवं भू-जल पुनर्भरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जल संरक्षण को सामुदायिक जिम्मेदारी बताया।

उद्यानिकी विभाग ने फसल विविधीकरण, सब्जी एवं बागवानी फसलों की संभावनाओं तथा उनके बीमा संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी। विभाग ने किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकृत खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे आय में वृद्धि के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायगढ़ के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने जलवायु सहनशील बीजों, उपयुक्त फसल चक्र, प्राकृतिक खेती तथा पर्यावरण संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।

कृषि विज्ञान केंद्र, रायगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. राजपूत ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए महिला सशक्तिकरण पर बल दिया। उन्होंने किसानों को जैविक खाद, गोबर खाद एवं अन्य स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का संदेश दिया।

कार्यशाला के दौरान किसानों ने विभिन्न विभागों के समक्ष नई डबरियों (फार्म पोंड) के निर्माण, वृक्षारोपण, कृषि एवं उद्यानिकी फसलों के फसल बीमा, बीज उत्पादक किसान पंजीयन तथा सौर ऊर्जा आधारित लिफ्ट सिंचाई की मांग रखी। विभागीय समन्वय के माध्यम से इन मांगों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। किसानों ने पुनर्योजी कृषि (रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर) एवं जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने में रुचि दिखाई तथा टिकाऊ कृषि विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री अजय जायसवाल (सहायक संचालक कृषि), श्री पोखराज पटेल (बीज प्रबंधक, बीज निगम), श्री जेम्स मिंज (उप बीज प्रमाणीकरण अधिकारी), श्री लेखराम पटेल (ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी), श्री प्रतोष मेहर (तकनीकी सहायक, मनरेगा), श्री धीरपाल सिंह (तकनीकी सहायक, मनरेगा), सुश्री श्रद्धा नायक (तकनीकी सहायक, मनरेगा), डॉ. ए.के. सिंह (अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय रायगढ़), डॉ. बी.एस. राजपूत (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़), श्री पंकज कुमार (सहायक विकास विस्तार अधिकारी, जनपद पंचायत रायगढ़), श्री असीत ज़ाक्सा (सहायक विकास विस्तार अधिकारी, जनपद पंचायत रायगढ़) सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समृद्ध एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।

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