ग्राम पंचायत बैजनपुरी के ग्रामीणों और जनपद सीईओ के बीच तीखी बहस, सचिव के स्थानांतरण की मांग
भानुप्रतापपुर ( उत्तर बस्तर कांकेर ) 05 जून। जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई, जब ग्राम पंचायत बैजनपुरी के लगभग 50 ग्रामीण पंचायत सचिव अश्वनी ध्रुव के स्थानांतरण एवं उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जी.एल. चुरेन्द्र को अपनी मांगों संबंधी आवेदन सौंपा।
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पंचायत सचिव पिछले कई वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ हैं तथा पंचायत संबंधी कार्यों के संचालन में लापरवाही बरत रही हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत भवन में नियमित उपस्थिति नहीं होने के कारण विभिन्न शासकीय योजनाओं और दस्तावेजों से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, आवेदन सौंपने के दौरान उनकी सीईओ से तीखी बहस हो गई, जो लगभग 20 मिनट तक चली। इस दौरान कार्यालय परिसर में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बजाय अधिकारी द्वारा असंतोषजनक व्यवहार किया गया।
ग्राम सरपंच सतीश कोरेटी, उपसरपंच द्वारिका प्रसाद यदु सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सचिव के कार्य व्यवहार को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
आवेदन में लगाए गए प्रमुख आरोप
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन में पंचायत सचिव पर समय पर कार्यालय नहीं आने, आवश्यक दस्तावेजों एवं योजनाओं से संबंधित कार्यों में विलंब तथा ग्रामीणों के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने सचिव के स्थानांतरण की मांग भी की है।
सीईओ की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों एवं कुछ जनप्रतिनिधियों ने जनपद सीईओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में शिकायतें की जाती रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक जांच कराने की मांग की है।
कमीशनखोरी के आरोप
कुछ ग्रामीणों एवं सूत्रों ने विकास कार्यों की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा कथित कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे व्यापक आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।