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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में माइग्रेशन पर रोक वैध

Madhya Pradesh High Court की जबलपुर खंडपीठ ने शिक्षक भर्ती 2024 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि जिन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) में आरक्षण के तहत दी गई छूट का लाभ लेकर पात्रता प्राप्त की है, वे सामान्य वर्ग (Unreserved Category) में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश Justice Sanjeev Sachdeva एवं न्यायमूर्ति Justice Vinay Saraf की खंडपीठ ने दिनांक 22 मई 2026 को सुनाया।

प्रमुख प्रकरण

यह निर्णय W.P. No. 5636/2025, Abhilash Jain & Others Vs. State of Madhya Pradesh & Others सहित अनेक संबद्ध याचिकाओं में पारित किया गया। इन याचिकाओं में प्रमुख रूप से W.P. No. 19644/2025, 23918/2025, 38165/2025, 40275/2025, 41837/2025, 47890/2025, 50575/2025, 105/2026, 331/2026, 7751/2025 आदि शामिल थीं।

मामले में याचिकाकर्ताओं ने भर्ती विज्ञापन 2024 की Clause 12.4 को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने चयन परीक्षा (Selection Examination) में सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, इसलिए उन्हें सामान्य वर्ग में चयन का लाभ मिलना चाहिए।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में प्रवेश का आधार भी है। यदि किसी अभ्यर्थी ने आरक्षित वर्ग की छूट का लाभ लेकर पात्रता प्राप्त की है, तो वह सामान्य वर्ग के समान स्तर पर नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन की Clause 12.4 वैध है तथा यह नियम 2018 के विपरीत नहीं है।

अंतिम आदेश

खंडपीठ ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि: Clause 12.4 वैध एवं प्रभावी है।

आरक्षित वर्ग की छूट लेकर TET उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में माइग्रेशन नहीं कर सकते।
सभी याचिकाएं निरस्त की जाती हैं।
The Vidhi Times की विशेष टिप्पणी

The Vidhi Times का मानना है कि यह निर्णय भविष्य की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं, विशेषकर आरक्षण एवं मेरिट आधारित चयन व्यवस्था के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण न्यायिक नजीर सिद्ध होगा। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि भर्ती नियमों या विज्ञापन में स्पष्ट प्रतिबंध मौजूद हो, तो आरक्षण में दी गई छूट का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी सामान्य वर्ग की सीटों पर दावा नहीं कर सकते। यह फैसला आने वाले समय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती विवादों में व्यापक रूप से उद्धृत किया जा सकता है।

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