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हरियाणा की राजनीति का वो किस्सा, जब ओम प्रकाश चौटाला को सिर्फ 5 दिन में छोड़नी पड़ी मुख्यमंत्री की कुर्सी


साल 1990 में हरियाणा की राजनीति में एक ऐसा अनोखा वाकया हुआ जब ओम प्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनने के महज 5 दिन बाद ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। दरअसल, दिसंबर 1989 में जब उनके पिता चौधरी देवीलाल देश के उप-प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने हरियाणा की कमान चौटाला को सौंप दी थी, लेकिन मुख्यमंत्री बने रहने के लिए चौटाला को 6 महीने के भीतर विधायक चुनकर आना जरूरी था। इसके लिए उन्होंने महम सीट से उपचुनाव लड़ा, लेकिन वहां भारी चुनावी धांधली और हिंसा के आरोपों के कारण मचे बवाल के बाद उन्हें 22 मई 1990 को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद बनारसी दास गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद चौटाला ने दड़बा कलां सीट से उपचुनाव जीत लिया और 12 जुलाई 1990 को दोबारा हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

चौटाला की इस दोबारा ताजपोशी से देश की केंद्रीय राजनीति में भूचाल आ गया, क्योंकि केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) की सरकार चल रही थी। वी.पी. सिंह और उनकी सरकार के कई वरिष्ठ नेता महम हिंसा के साए की वजह से चौटाला को दोबारा मुख्यमंत्री बनाए जाने के सख्त खिलाफ थे और विरोध में केंद्र के कई मंत्रियों ने इस्तीफे तक की पेशकश कर दी थी, जिससे केंद्र सरकार गिरने का खतरा पैदा हो गया था। प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के कड़े रुख और केंद्र सरकार को बचाने के भारी राजनीतिक दबाव के आगे आखिरकार चौटाला और उनके पिता चौधरी देवीलाल को झुकना पड़ा, जिसके बाद महज 5 दिन पूरे होने पर 17 जुलाई 1990 को ओम प्रकाश चौटाला ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया और उनकी जगह मास्टर हुकम सिंह को नया मुख्यमंत्री बनाया गया।

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