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आप लोगों की क्या राय है चुनाव EVM मशीन से हो या बैलट पेपर पर ?????

चुनाव बैलट पेपर से नही EVM से कराया जा रहा है. चुनाव से पहले हर पार्टी हर नेता EVM पर खामोश रहते हैं. हारने के बाद EVM पर कुछ दिनों के लिए बहस शुरू होती है जो कुछ दिन चलने के बाद ठंडी पड़ जाती है.

EVM की विश्वसनीयता संदिग्ध है. EVM बनाने वाला जापान अपने यहां बैलट पेपर पर चुनाव कराता है और हम भारतीय ?

EVM में पड़ा वोट की गिनती और VVPAT पेपर की गिनती एक समान होने पर भी EVM पर थोड़ा बहुत भरोसा किया जा सकता है. यह तभी मुमकिन जब VVPAT पेपर को गिना जाएगा.

1991 से पहले राष्ट्रीय चुनाव तीन से सात दिन और राज्य के चुनाव एक दिन में हो जाते थे. 1991 का चुनाव सुरक्षा के नाम पर टीएन शेषन ने कुल तीन चरणों में, 20 मई 12 जून और 15 जून में कराए थे. यह भारत के इतिहास का लंबा चुनाव था.

EVM आने के बाद भारत का चुनाव दुनिया का सबसे लंबा और उबाऊ चुनाव बन चुका है.

अमेरिका, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान हर देश बैलट पेपर पर चुनाव कर अपने यहां लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं और भारत EVM जैसी संदिग्ध मशीन पर चुनाव कराकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहा है.

आप लोगों की क्या राय है चुनाव EVM मशीन से हो या बैलट पेपर पर ?????

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