घूसराज पर 'निगरानी' का प्रहार:
फुलवारी शरीफ में राजस्व कर्मचारी और दलाल रंगे हाथों ढेर,
पंचायत भवन बना 'रिश्वत का अड्डा'
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पटना : बिहार में सुशासन के दावों के बीच भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी एक बानगी आज राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में देखने को मिली।
जब जनता की सेवा के लिए बना 'पंचायत भवन' ही रिश्वतखोरी का सौदाघर बन गया, तो निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम को कमान संभालनी पड़ी।
ब्यूरो के धावादल ने एक सटीक और त्वरित कार्रवाई करते हुए मैनपुरन्दा पंचायत के राजस्व कर्मचारी (हल्का कर्मचारी) राणा रणविजय गोपाल को 35,000 रुपये और उसके दलाल गुड्डू कुमार को 10,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।
यह गिरफ्तारी सिर्फ दो लोगों की नहीं है, बल्कि यह उस 'सरकारी नेक्सस' का पर्दाफाश है जो बिना दलालों के सांस तक नहीं लेता।
'अवैध अतिक्रमण' की रिपोर्ट पर 'वैध घूस' का खेल,
मामला एक आम नागरिक के हक से जुड़ा था। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार सुमन अपने प्लॉट के पास मुख्य सड़क से अवैध अतिक्रमण हटवाना चाहते थे। नियम के मुताबिक, राजस्व कर्मचारी का काम इस पर निष्पक्ष रिपोर्ट देना था ताकि अतिक्रमण हटाया जा सके।
लेकिन साहब और उनके दलाल ने इसे 'कमाई का जरिया' बना लिया।
रिपोर्ट तैयार करने के एवज में बकायदा किस्तों में घूस तय हुई—35 हजार कर्मचारी के लिए और 10 हजार दलाल की 'मेहनत' के लिए।
पीड़ित ने घुटने टेकने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की ठानी और निगरानी ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया।
ब्यूरो ने जब मामले का गुपचुप सत्यापन कराया, तो आरोप सौ फीसदी सच पाए गए।
24 घंटे के भीतर 'ऑपरेशन क्लीन',
निगरानी ब्यूरो की कार्यशैली इस मामले में काबिले तारीफ रही।
03 जून 2026 को निगरानी थाना में कांड संख्या 069/26 के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है और अगले ही दिन यानी 04 जून को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) श्रीमती रिशिता स्नेह के नेतृत्व में एक विशेष धावादल का गठन होता है।
टीम जाल बिछाती है और जैसे ही मैनपुरन्दा पंचायत भवन में घूस की रकम (कुल 45,000 रुपये) हाथों-हाथ बदलती है, निगरानी की टीम दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लेती है।
सरकारी दफ्तर में अचानक हुई इस छापेमारी से वहां मौजूद अन्य कर्मियों में हड़कंप मच गया।
व्यवस्था पर बड़ा सवाल:
कब थमेगा दलाली राज?
यह कार्रवाई इस बात का सबूत है कि आज भी जमीनी स्तर पर बिना पैसे दिए आम आदमी का कोई जायज काम होना भी नामुमकिन सा हो गया है।
एक राजस्व कर्मचारी, जिस पर जमीन और राजस्व के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी है, वह दलालों के सहारे समानांतर व्यवस्था चला रहा है।
निगरानी ब्यूरो अब दोनों अभियुक्तों से पूछताछ के बाद उन्हें विशेष न्यायालय (निगरानी) पटना के समक्ष पेश करने जा रही है और आगे का अनुसंधान जारी है।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—जब तक ऐसे छोटे-बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों का दलालों से यह अपवित्र गठजोड़ नहीं टूटेगा, तब तक क्या आम आदमी को बिना घूस दिए न्याय मिल पाएगा?
निगरानी की इस कार्रवाई ने भ्रष्टाचारियों को कड़ा संदेश तो दिया है, लेकिन सिस्टम की सफाई के लिए ऐसे कई और 'ब्लास्ट' ऑपरेशन्स की जरूरत है।