बंदूक से कलम तक भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के संरक्षण का बीड़ा उठाया
गानौर, सोनीपत (हरियाणा)।
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सेवारत UN Peacekeeper, लेखक एवं इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क ने सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का ऐतिहासिक बीड़ा उठाया है।
24 वर्षों की गौरवपूर्ण सैन्य सेवा (1984–2008) के पश्चात् निम्बार्क ने कलम को अपना नया शस्त्र बनाया और पिछले 18 वर्षों से सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा, निम्बार्क सम्प्रदाय एवं संत-योद्धा परंपरा पर अथक शोध एवं लेखन कार्य में संलग्न हैं।
उन्होंने बताया कि सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा भारत की सबसे प्राचीन और अखंड आध्यात्मिक धाराओं में से एक है। वैष्णव बैरागी केवल साधु नहीं थे — वे संत भी थे और योद्धा भी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में इन्हीं वीर बैरागी योद्धाओं ने भगवा वस्त्र धारण कर ब्रिटिश सेना का डटकर सामना किया। यह वह इतिहास है जिसे मुख्यधारा की पाठ्यपुस्तकों ने सदैव अनदेखा किया।
निम्बार्क ने आगे कहा कि निम्बार्क सम्प्रदाय इसी दिव्य परंपरा का सबसे प्राचीन और दार्शनिक स्तम्भ है। आचार्य निम्बार्काचार्य का द्वैताद्वैत दर्शन और राधा-कृष्ण की युगल उपासना इस सम्प्रदाय की अद्वितीय पहचान है।
उल्लेखनीय है कि नरेश दास वैष्णव निम्बार्क की 11 से अधिक पुस्तकें विश्व के 190 से अधिक देशों में Amazon Kindle, Google Play Books, Apple Books एवं Kobo पर उपलब्ध हैं। उनकी वेबसाइट www.nareshswaminimbark.in पर सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा से सम्बंधित शोध-आधारित सामग्री उपलब्ध है।
उनका कहना है कि यह पहल समाज में सनातन परंपरा के प्रति जागरूकता लाने और आने वाली पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से की जा रही है।
राष्ट्र प्रथम — यही मेरा संकल्प, यही मेरी पहचान।
— नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार, भारतीय सेना
लेखक | इतिहासकार | स्वतंत्र शोधकर्ता
गानौर, सोनीपत, हरियाणा
www.nareshswaminimbark.in