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खुद गाड़ी चोरी की FIR कराने वाला भाजपा मंडल अध्यक्ष ही निकला मास्टरमाइंड, कोर्ट ने जारी किया NBW वारंट

आगरा जगनेर
भाजपा का जगनेर मंडल अध्यक्ष का गजब कारनामा


- ​साजिश ऐसी कि फिल्में भी फेल: पैसे की तंगी में सगे भाई के साथ मिलकर रची थी साजिश, फर्जी चाबी बनवाकर पार कराई थी अपनी ही बेची हुई बोलेरो।


करीब ​400 पन्नों की चार्जशीट में खुलासा: वादी देवकी नंदन उर्फ़ सोनू शर्मा, उसका भाई मनमोहन और जयपुर का खरीदार पुनीत बने आरोपी.



कानून की आंख में धूल झोंकने और अपनों को ही दगा देने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और जनता दोनों को हैरान कर दिया है। जगनेर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में हुई एक बोलेरो गाड़ी की चोरी के मामले में जो व्यक्ति खुद 'वादी' बनकर पुलिस के पास गुहार लगाने पहुंचा था, वही इस पूरे वाहन चोरी कांड का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) निकला। आरोपी कोई और नहीं, बल्कि वर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष जगनेर देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा है। पुलिस की करीब 400 पन्नों की चार्जशीट के बाद अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी मंडल अध्यक्ष और उसके भाई के खिलाफ एनबीडब्लू (गैर-जमानती वारंट) जारी कर दिया है।


​पूरी रकम डकार गए, फिर भाई से ही करा दी गाड़ी चोरी


​मामले की परतें जब खुलीं तो पुलिस के भी होश उड़ गए। दरअसल, जगनेर थाना क्षेत्र के अंतर्गत 22 मार्च 2024 की रात (23 मार्च की सुबह) दीपक कुमार के घर के सामने से एक बोलेरो गाड़ी (संख्या: UP 80 ET 1679) चोरी हो गई थी। इस मामले में देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा ने जगनेर थाने में क्राइम नंबर 32/2024 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
​ट्वीस्ट इस कहानी में तब आया जब पता चला कि देवकी नंदन इस गाड़ी को पहले ही जगनेर निवासी दीपक कुमार को बेच चुका था और उससे पूरे पैसे भी ऐंठ चुका था। पैसे लेने के बावजूद उसने गाड़ी दीपक के नाम ट्रांसफर नहीं की थी। पुलिस ने काफी प्रयास किया, लेकिन गाड़ी न मिलने पर अंतिम रिपोर्ट (FR) लगा दी थी।


​टोल टैक्स के मैसेज ने खोला राज, कमिश्नर के आदेश पर कगरोल पुलिस ने दबोचा


​गाड़ी के असली खरीदार दीपक कुमार ने हिम्मत नहीं हारी और एफआर लगने के बाद भी अपने स्तर से गाड़ी की तलाश जारी रखी। इसी बीच एक दिन अचानक दीपक कुमार के चचेरे भाई के मोबाइल पर उसी बोलेरो गाड़ी के नंबर से टोल टैक्स कटने का मैसेज आया। इस पुख्ता सबूत को लेकर दीपक कुमार तुरंत आगरा पुलिस कमिश्नर से मिले।
​मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने जांच जगनेर पुलिस से हटाकर तत्कालीन कागारोल थाना प्रभारी अंकुर मलिक को सौंप दी। थाना प्रभारी अंकुर मलिक ने सर्विलांस का जाल बिछाया और आगरा-जयपुर हाईवे पर दौसा (राजस्थान) से बोलेरो को बरामद कर लिया। मौके से जयपुर निवासी आरोपी पुनीत सिरोही को गिरफ्तार किया गया।


​भगवान टॉकीज के सामने बनी थी नकली चाबी, CDR ने खोली पोल


​गिरफ्तार आरोपी पुनीत सिरोही ने पुलिस की पूछताछ और चार्जशीट के बयानों में जो उगला, उसने पूरी कहानी को पलट कर रख दिया। पुनीत ने बताया कि उसने यह बोलेरो गाड़ी ₹2,00,000 के लालच में मनमोहन शर्मा उर्फ छोटू (निवासी जगनेर) से खरीदी थी। जब पुलिस ने मनमोहन की कुंडली खंगाली तो पता चला कि वह तो एफआईआर दर्ज कराने वाले वादी देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा का ही सगा भाई है!
​इसके बाद जब पुलिस ने दीपक कुमार से से पूछताछ की, तो चौंकाने वाली टाइमलाइन सामने आई:

​21 मार्च 2024: देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा आगरा के सेवला जाने का बहाना बनाकर दीपक से गाड़ी मांगकर ले गया।
​21 मार्च की रात: वह गाड़ी खड़ी करके चाबी घर दे गया।


​साजिश की कमान: पुलिस जांच और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) की कॉपी से खुलासा हुआ कि देवकी नंदन सेवला गया ही नहीं था, बल्कि वह भगवान टॉकीज के सामने से गाड़ी की नकली चाबी बनवाने गया था। इसकी पूरी सीडीआर रिपोर्ट पुलिस ने चार्जशीट में शामिल की है।


​भाई व देवकी नंदन ने कबूला जुर्म: 'पैसे की तंगी के कारण रचा था जाल'

​मंडल अध्यक्ष के भाई मनमोहन शर्मा ने पुलिस को दिए बयानों में साफ कबूल किया कि पैसे की तंगी के कारण उसने और उसके भाई देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा ने मिलकर यह पूरी साजिश रची थी। नकली चाबी बनवाने के बाद गाड़ी को दीपक के घर के सामने से चोरी करवा दिया गया और जयपुर के पुनीत सिरोही को बेच दिया गया।


करीब ​400 पन्नों की चार्जशीट और कोर्ट का कड़ा चाबुक

​तत्कालीन कागारोल थाना पुलिस ने इस पूरे मामले में करीब 400 पन्नों की पुख्ता और वैज्ञानिक साक्ष्यों से लैस चार्जशीट (आरोप पत्र) कोर्ट में दाखिल की है। इसमें पुनीत सिरोही, मनमोहन शर्मा और मुख्य साजिशकर्ता के रूप में वर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष जगनेर देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा को आरोपी बनाया गया है।
​अदालत द्वारा इस मामले में आरोपी भाइयों को बार-बार समन और नोटिस भेजे गए, लेकिन सत्ता की हनक या गिरफ्तारी के डर से दोनों कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इस पर अदालत ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए देवकी नंदन उर्फ सोनू शर्मा और मनमोहन शर्मा के खिलाफ एनबीडब्लू (गैर-जमानती वारंट) जारी कर दिया है।


​ "जो रक्षक था, वही भक्षक निकला। सत्ता की धमक के पीछे छिपा यह चेहरा अब बेनकाब हो चुका है। पीड़ित दीपक कुमार को न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं इस खुलासे के बाद स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।"

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