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राष्ट्रीय कवि संगम एवं लोक साहित्य संस्कृति के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी आयोजित

राष्ट्रीय कवि संगम एवं लोक साहित्य संस्कृति के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी आयोजित



राष्ट्रीय कवि संगम एवं लोक साहित्य संस्कृति के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय सेवा शिविर कार्यक्रम के अध्यक्ष, कवि एवं दिल्ली में अंग्रेजी प्रवक्ता श्री गजेंद्र कौशिक"गजानन" जी के संयोजन में एक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।



ऑनलाइन काव्य कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री जितेंद्र महाजन जी विधायक रोहताश नगर, शाहदरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद श्री संजय स्वामी जी ने की। गोष्ठी में सम्मिलित सभी रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूक करने वाली रचनाएँ पढ़ी।कार्यक्रम का केंद्रीय संचालन प्रसिद्ध कवियित्री पारुल धामा ‘’ मन “ खेकड़ा नगर के रामपुर पट्टी स्थित आवास पर रहा ।



शिक्षिका एवं कवियत्री पूनम नैन मलिक जी के संचालन में अधिवक्ता हर्ष भारद्वाज की रचना में माँ गंगा के प्रति प्रेम की झलक अद्भुत रही। कवियत्री एवं शिक्षिका पारुल चौधरी "मन" द्वारा पेड़ पौधों के कटान पर भविष्य के प्रति चिन्ता व्यक्त की गई।सभी ने कविताओं के माध्यम से अपने-अपने विचार साझा किये।







जो लगाये थे पौधे वो पेड़ हो गये - कवि गजेंद्र कौशिक "गजानन"



सुनी वसुंधरा पाती है नित्य तुम ही से श्रृंगार - कवि अजय तोमर



आओ मिलकर करें मनन, लुप्त हुए क्यों अपने वन - कवियत्री पारुल चौधरी "मन"



गंगोत्री से गंगासागर तक, माँ गंगा पुकार रही - कवि हर्ष भारद्वााज़



पेड़ों से सबको मिले, भोजन,पानी,साँस - कवियत्री पूनम नैन मलिक



गिर रहे हैं पहाड़ का रहे हैं रूठ कर - कवियत्री मुस्कान सागर "सना"



रोको और सभी को डांटो, ये हरे-भरे पेड़ न काटो - कवि कश्यप राजेश "राज़"



अब भी समय है बचा लो अपना पर्यावरण - कवियत्री भावना तोमर



शाख रही तो फूल भी पत्ते भी आएंगे







गोष्ठी में पर्यावरण के प्रति प्रेम और जागरूकता से जुड़ी कविताओं का सभी श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया और संकल्प किया कि न सिर्फ़ कविताओं के माध्यम से अपितु हम सभी मिलकर पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों का भली-भांति निर्वहन करेंगे।

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