logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

*2027 की बिसात बिछनी शुरू! सुल्तानपुर से ओम प्रकाश राजभर की विदाई, भाजपा ने बदला सियासी समीकरण* *प्रभारी मंत्री बदलते ही तेज हुई राजनीतिक चर्चाएं, चु

*2027 की बिसात बिछनी शुरू! सुल्तानपुर से ओम प्रकाश राजभर की विदाई, भाजपा ने बदला सियासी समीकरण*

*प्रभारी मंत्री बदलते ही तेज हुई राजनीतिक चर्चाएं, चुनावी तैयारी का बड़ा संकेत माना जा रहा फैसला*

सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार द्वारा जिलों के प्रभारी मंत्रियों में किए गए फेरबदल ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सुल्तानपुर जिले के प्रभारी मंत्री रहे ओम प्रकाश राजभर की जगह अब गिरीश चंद्र यादव को जिले की कमान सौंप दी गई है।
करीब तीन वर्षों तक सुल्तानपुर के प्रभारी मंत्री रहे ओम प्रकाश राजभर का कार्यकाल राजनीतिक गतिविधियों और बयानों को लेकर लगातार चर्चा में रहा। खासकर इसौली विधानसभा क्षेत्र में उनकी पार्टी सुभासपा की बढ़ती सक्रियता ने भाजपा के अंदर भी हलचल पैदा की थी। वलीपुर बाजार में आयोजित विशाल जनसभा और शक्ति प्रदर्शन को राजभर की राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा गया था।
राजभर ने इसौली विधानसभा में संगठन को मजबूत करने के लिए बल्दीराय ब्लॉक प्रमुख शिव कुमार सिंह को विधानसभा प्रभारी नियुक्त किया था। इसके बाद क्षेत्र में सुभासपा की सक्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दी। वहीं भाजपा के कई स्थानीय नेताओं ने भी इस पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रामचंद्र मिश्रा का यह बयान काफी चर्चित रहा था कि "इसौली कोई चारागाह नहीं है कि कोई भी मुंह उठाकर आ जाए।"
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रभारी मंत्री के रूप में ओम प्रकाश राजभर का जिला बदलना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है। अब उन्हें अम्बेडकर नगर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि सुल्तानपुर की कमान गिरीश चंद्र यादव को मिली है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरीश चंद्र यादव के गुरुवार को सुल्तानपुर पहुंचने और जिला समन्वय समिति की बैठक में भाग लेने का कार्यक्रम है। इसके अलावा वह भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन की नब्ज टटोलेंगे।
सियासी जानकारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रभारी मंत्री बदलने के बाद जिले की राजनीति किस करवट बैठती है। इतना तय है कि 2027 की जंग को लेकर भाजपा ने अभी से अपने मोहरे चलने शुरू कर दिए हैं और सुल्तानपुर का यह बदलाव उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

*जातीय समीकरण की नई बिसात*
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुल्तानपुर में प्रभारी मंत्री के बदलाव के पीछे केवल संगठनात्मक कारण नहीं, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति भी छिपी हुई है। पूर्वांचल की राजनीति में राजभर समाज का प्रभाव रखने वाले ओम प्रकाश राजभर को जिले से हटाकर यादव समाज से आने वाले गिरीश चंद्र यादव को जिम्मेदारी सौंपना भाजपा की सामाजिक इंजीनियरिंग का हिस्सा माना जा रहा है।
सुल्तानपुर जिले की कई विधानसभा सीटों पर यादव, कुर्मी, राजभर, निषाद, ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रहती है। ऐसे में भाजपा 2027 के चुनाव से पहले हर वर्ग में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी का पारंपरिक आधार माने जाने वाले यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तहत भाजपा ने यह कदम उठाया है।
वहीं दूसरी ओर, ओम प्रकाश राजभर की सक्रियता से सुभासपा का प्रभाव कुछ क्षेत्रों में बढ़ता दिखाई दे रहा था, जिससे भाजपा के स्थानीय नेतृत्व में असहजता भी महसूस की जा रही थी। ऐसे में प्रभारी मंत्री बदलकर भाजपा ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि जिले में पार्टी का मूल संगठन ही चुनावी रणनीति का केंद्र रहेगा।
विश्लेषकों के अनुसार भाजपा अब केवल एक जाति या वर्ग पर निर्भर रहने के बजाय "सबका साथ, सबका विकास" के साथ-साथ बूथ स्तर पर जातीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। यही कारण है कि 2027 के चुनाव से पहले संगठनात्मक फेरबदल में सामाजिक और जातीय प्रतिनिधित्व को विशेष महत्व दिया जा रहा है। सुल्तानपुर में हुआ यह बदलाव भी उसी व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी झलक आने वाले महीनों में और स्पष्ट दिखाई दे सकती है।

0
91 views

Comment