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गया में माइनिंग माफिया पर 'शुभंकर' प्रहार: 281 छापेमारी, करोड़ों का जुर्माना और थर-थर कांपता सिंडिकेट!


विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी : ​बिहार में 'बालू' और 'खनिज' का अवैध धंधा सिर्फ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि यह समानांतर अर्थव्यवस्था और अपराध के सिंडिकेट को भी पालता-पोषता है।

लेकिन गया जिले से आई ताजा प्रशासनिक रिपोर्ट यह साफ संदेश दे रही है कि कानून के राज में माफिया चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसका ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की कोठरी होगी।



जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के एक कड़े और स्पष्ट निर्देश ने जिले के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खेल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है।

अप्रैल और मई के महज दो महीनों के भीतर 281 बार हुई छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि जिला प्रशासन इस बार 'दिखावे की कार्रवाई' के मूड में बिल्कुल नहीं है।



​ सरकारी हंटर का खौफ:

93 गाड़ियां जब्त, 18 माफिया सलाखों के पीछे,

​अमूमन देखा जाता है कि खनन माफिया पुलिस की गाड़ी देखकर भाग निकलने में सफल हो जाते हैं, या फिर स्थानीय स्तर पर साठगांठ कर बच निकलते हैं।



लेकिन इस बार खनन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त 'कमांडो स्टाइल' रणनीति ने माफियाओं को संभलने का मौका ही नहीं दिया।

​93 वाहनों की विधिवत जब्ती और 52 मुकदमों का दर्ज होना कोई साधारण बात नहीं है।

सबसे बड़ी बात यह है कि 18 अवैधकर्ताओं को सीधे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

यह उन सफेदपोश आकाओं के मुंह पर करारा तमाचा है जो पर्दे के पीछे रहकर इस अवैध साम्राज्य को संचालित करते हैं।



​ राजस्व का रिकॉर्ड ब्लास्ट:

माफिया की जेब कटी, सरकार की तिजोरी भरी,

​इस पूरी कार्रवाई का सबसे सुखद पहलू है राजस्व का रिकॉर्ड संग्रह।

मई 2026 तक 1416.82 लाख रुपये का राजस्व समाहरण करना जिला खनन कार्यालय की बहुत बड़ी कामयाबी है।

पिछले साल की तुलना में 508.53 लाख रुपये की भारी बढ़ोतरी यह चीख-चीख कर कह रही है कि अगर कड़ाई बरती जाए, तो सरकार की कमाई को दोगुना होने से कोई नहीं रोक सकता।



​"यह बढ़ा हुआ राजस्व इस बात का सुबूत है कि पहले जो करोड़ों रुपये बिचौलियों, रसूखदारों और खनन माफियाओं की तिजोरियों में काले धन के रूप में जमा होते थे, अब वे विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

280 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना यह तय करेगा कि अगली बार अवैध परिवहन करने से पहले ट्रक और पोकलेन मालिकों की रूह कांप उठे।"



​ 'जीरो टॉलरेंस' का कड़ा संदेश,

​जिला खनन पदाधिकारी का यह बयान कि 'कार्रवाई आगे और कठोर होगी', माफियाओं के लिए अंतिम चेतावनी है।

गया जिला अपनी भौगोलिक बनावट के कारण अवैध बालू और पत्थर उत्खनन के लिए हमेशा से संवेदनशील रहा है।

ऐसे में शशांक शुभंकर का यह 'कमांड कंट्रोल' मॉडल न केवल प्रकृति (नदियों और पहाड़ों) की रक्षा कर रहा है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है।



​अंतिम निष्कर्ष :

​अवैध खनन के खिलाफ गया जिला प्रशासन की यह कार्रवाई पूरे सूबे के लिए एक 'रोल मॉडल' है।

यह कार्रवाई बताती है कि जब नेतृत्व दृढ़ हो, तो पुलिस और प्रशासन मिलकर किसी भी सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ सकते हैं।

281 छापेमारी और 5 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त राजस्व केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह सुशासन का जीता-जागता प्रमाण पत्र है।

उम्मीद है कि गया प्रशासन का यह हंटर इसी तरह चलता रहेगा, ताकि सूबे की प्राकृतिक संपदा को लूटने वाले लुटेरे कभी दोबारा सिर उठाने की हिम्मत न कर सकें।

अब वक्त आ गया है कि इस धंधे के बड़े मगरमच्छों पर भी आर्थिक चोट (संपत्ति जब्ती) जैसी कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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