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बिना लिखित आदेश व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं प्रभावित, ई-अटेंडेंस पोर्टल बंद होने से बढ़ी चिंता


शहडोल। मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) कार्यक्रम से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं बिना किसी लिखित आदेश के प्रभावित किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्यप्रदेश व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि प्रशिक्षकों को मौखिक रूप से यह सूचना दी गई है कि आगामी आदेश तक उनकी सेवाएं स्थगित रहेंगी, जबकि इस संबंध में विभाग अथवा संबंधित एजेंसी द्वारा कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। साथ ही VTS Manpower App में संचालित ई-अटेंडेंस पोर्टल को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में वर्षों से व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को नियमित शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ रोजगारपरक एवं कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना तथा उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।
विद्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, पर्यटन एवं आतिथ्य, सुरक्षा, ब्यूटी एंड वेलनेस सहित अनेक व्यवसायिक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थी केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक कौशल भी प्राप्त करते हैं, जो उन्हें भविष्य में रोजगार प्राप्त करने और स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता प्रदान करता है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) में व्यावसायिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। नीति के अनुसार विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है ताकि वे बदलती औद्योगिक एवं रोजगार संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। ऐसे समय में जब केंद्र एवं राज्य सरकारें कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही हैं, तब व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाओं पर अनिश्चितता का वातावरण बनना चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि व्यावसायिक प्रशिक्षक केवल अध्यापन कार्य ही नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के कौशल मूल्यांकन, उद्योगों से समन्वय, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT), इंटर्नशिप, करियर मार्गदर्शन, रोजगार परामर्श, प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से विद्यालयों में संचालित कौशल विकास कार्यक्रम प्रभावी रूप से संचालित होते हैं।
संघ के अनुसार प्रशिक्षकों को मौखिक रूप से सेवाएं स्थगित होने की जानकारी देना और दूसरी ओर ई-अटेंडेंस पोर्टल को बंद कर देना अनेक प्रशासनिक प्रश्न खड़े करता है। यदि किसी प्रकार का निर्णय लिया गया है तो उसे पारदर्शी तरीके से लिखित आदेश के माध्यम से सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बिना लिखित आदेश के सेवाएं प्रभावित करना प्रशासनिक पारदर्शिता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
संघ ने यह भी कहा कि इस स्थिति से प्रदेशभर के हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षकों एवं उनके परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कई प्रशिक्षक वर्षों से इस योजना के अंतर्गत अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उनकी आजीविका का प्रमुख आधार यही कार्य है। अचानक सेवाएं प्रभावित होने से उनमें भविष्य को लेकर असुरक्षा एवं चिंता का माहौल व्याप्त है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम का सीधा संबंध विद्यार्थियों के भविष्य से है। यदि प्रशिक्षकों की सेवाएं बाधित होती हैं तो विद्यालयों में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों की कौशल आधारित शिक्षा प्रभावित होगी। इसका असर राज्य सरकार के कौशल विकास, रोजगार सृजन एवं आत्मनिर्भर भारत जैसे उद्देश्यों पर भी पड़ सकता है।
मध्यप्रदेश व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ ने राज्य शासन, स्कूल शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय तथा संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि कोई प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है तो उसकी प्रति सभी प्रशिक्षकों को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही ई-अटेंडेंस पोर्टल को पुनः प्रारंभ कर प्रशिक्षकों की सेवा, मानदेय एवं भविष्य संबंधी स्थिति स्पष्ट की जाए।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस विषय पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के व्यावसायिक प्रशिक्षक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने शासन से विद्यार्थियों के हित, कौशल विकास कार्यक्रमों की निरंतरता तथा हजारों प्रशिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है।

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