बिना लिखित आदेश व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाएं स्थगित किए जाने का आरोप, ई-अटेंडेंस पोर्टल भी बंद
शहडोल। मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों में कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) की सेवाएं बिना किसी लिखित आदेश के अचानक स्थगित किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्यप्रदेश व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के शहडोल जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शासन एवं विभाग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि प्रदेशभर के व्यावसायिक प्रशिक्षकों को उनकी संबंधित एजेंसियों द्वारा मौखिक रूप से सूचित किया गया है कि आगामी आदेश तक उनकी सेवाएं स्थगित रहेंगी। आश्चर्यजनक रूप से इस संबंध में न तो कोई लिखित आदेश उपलब्ध कराया गया है और न ही विभाग अथवा एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक सूचना जारी की गई है। इसके साथ ही प्रशिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले VTS Manpower App के ई-अटेंडेंस पोर्टल को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे प्रशिक्षक विद्यालयों में अपनी नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं।
संघ का कहना है कि व्यावसायिक प्रशिक्षक पिछले कई वर्षों से विद्यालयों में विद्यार्थियों को सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनेस सहित विभिन्न कौशल आधारित विषयों का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) में भी विद्यालय स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध हो सके। ऐसे में प्रशिक्षकों की सेवाओं को अचानक प्रभावित किए जाने से न केवल प्रशिक्षकों का भविष्य संकट में पड़ गया है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई एवं व्यावसायिक शिक्षा की निरंतरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय ने कहा कि किसी भी कर्मचारी, संविदा कर्मी अथवा सेवा प्रदाता के विरुद्ध सेवा समाप्ति, सेवा स्थगन अथवा कार्यमुक्ति जैसी कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी के विधिवत लिखित आदेश के माध्यम से ही की जानी चाहिए। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार प्रभावित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करना भी आवश्यक होता है। बिना किसी लिखित आदेश के केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर सेवाएं रोकना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में प्रशिक्षकों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। प्रदेश के हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक एवं उनके परिवार इस रोजगार पर निर्भर हैं। यदि सेवाएं स्थगित करने संबंधी कोई निर्णय लिया गया है तो उसकी स्पष्ट जानकारी, अवधि, कारण तथा भविष्य की कार्ययोजना प्रशिक्षकों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं यदि कोई विभागीय प्रक्रिया प्रचलन में है तो उसके संबंध में भी आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
संघ ने शासन, स्कूल शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा केंद्र तथा संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों से मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही VTS Manpower App के ई-अटेंडेंस पोर्टल को बंद किए जाने के कारण सार्वजनिक किए जाएं, प्रशिक्षकों के लंबित मानदेय एवं सेवा सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं तथा विद्यार्थियों की व्यावसायिक शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मध्यप्रदेश व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ के शहडोल जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई और प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के व्यावसायिक प्रशिक्षक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से अपनी आवाज शासन तक पहुंचाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों के हितों की रक्षा करना तथा कौशल आधारित शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना शासन और विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।