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फरेंदा प्रकरण में न्याय की मांग तेज, सोशल मीडिया पर उठा #MaharajganjPoliceDoJustice अभियान

महाराजगंज। फरेंदा थाना क्षेत्र में दर्ज FIR संख्या 0119/2026 को लेकर न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। मामले में पीड़ित परिवार द्वारा निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है।



क्या है मामला?



प्राप्त जानकारी के अनुसार 28 अप्रैल 2026 की रात एक परिवार विवाह समारोह में शामिल होने जा रहा था। आरोप है कि परसमहंत डिवाइडर के पास कुछ लोगों द्वारा रास्ता रोककर विवाद किया गया, जिसके बाद मारपीट की घटना हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस दौरान परिवार के कई सदस्य घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।



मामले में पुलिस ने कई नामजद और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।



महिलाओं और बच्चों से जुड़े आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के दौरान महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया। परिवार का कहना है कि घायल महिलाओं का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया, लेकिन उनके अनुसार अब तक मामले में महिलाओं से संबंधित उपयुक्त धाराओं को शामिल नहीं किया गया है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई है।

परिवार ने मांग की है कि महिलाओं के साथ हुई कथित मारपीट, अभद्र व्यवहार और अन्य आरोपों के संबंध में उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िताओं के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत अनुवर्ती (Follow-up) FIR अथवा पूरक विवेचना की जाए तथा महिला सुरक्षा से संबंधित आवश्यक धाराओं को जोड़ा जाए। परिवार का कहना है कि ऐसा न होने से मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं की समुचित जांच प्रभावित हो रही है।


अतिरिक्त साक्ष्यों की जांच की मांग


पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो के आधार पर कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई। परिवार ने दावा किया है कि संबंधित जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई जा चुकी है और उन तथ्यों की जांच की मांग की गई है।



सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा



मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #MaharajganjPoliceDoJustice अभियान चलाया गया। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराना है।



सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा मामले की वर्तमान जांच स्थिति सार्वजनिक करने, सभी उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।



पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल



पीड़ित परिवार ने मामले की जांच से जुड़े तत्कालीन जांच अधिकारी और थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपों की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही मामले में किसी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या अन्य अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की गई है।



राजनीतिक प्रभाव के आरोप



पीड़ित पक्ष ने अपने आवेदन में कुछ आरोपियों द्वारा राजनीतिक प्रभाव का दावा किए जाने की बात कही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। परिवार ने इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।



जनता के बीच उठ रहे प्रमुख सवाल



* मामले की जांच वर्तमान में किस चरण में है?

* महिलाओं और बच्चों से जुड़े आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई?

* पुलिस को उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त साक्ष्यों की जांच का क्या परिणाम रहा?

* नामजद और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई?

* जांच अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों की समीक्षा कब होगी?

* क्या मामले में किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही हुई है?



निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिक मांग निष्पक्ष जांच और न्याय है। परिवार ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा, गवाहों की सुरक्षा तथा मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग मामले की पारदर्शी जांच और कानून के अनुरूप कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वहीं सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में नागरिक मामले की पारदर्शी जांच और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके और न्याय प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।

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