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गुरदीप कौर की प्रकृति और जीवन पर कविता

मुरादाबाद (उ.प्र.): गुरदीप कौर ने प्रकृति और जीवन की विविधता को अपनी कविता में बखूबी प्रस्तुत किया है। कविता में बादल, हवा, पेड़-पौधे, फूल-पत्ते, तितलियाँ, हरे-भरे खेत और पगडंडियों का चित्रण है। साथ ही पहाड़, नदियाँ, कश्तियाँ, पत्थर के मंदिर और मूरतों का वर्णन भी शामिल है, जो प्रकृति और संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।



कविता में चाँद, सूरज, आकाश, तारे और ब्रह्मांड की पहेलियाँ भी समाहित हैं। संगमरमरी महल और गगनचुंबी इमारतों के माध्यम से धनाढ्यों की कोठियों का उल्लेख करते हुए, कवयित्री ने जीवन के विभिन्न पहलुओं को संवेदनशीलता से उकेरा है। जलचर, नभचर, जीव-जंतु, कीट-पतंगे तथा नर-नारियाँ के रंग-रूप को भी कविता में जगह मिली है, जो जीवन की विविध कला को दर्शाता है।

✍️✍️सब उसकी कलाकारियॉं✍️✍️
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बादल, हवा, पेड़-पौधे, फूल-पत्ते, तितलियाँ
हरे-भरे खेत, खेतों से जाती पगडंडियां
पहाड़, नदियाँ, नदिया किनारे
इंतज़ार में कश्तियाँ
पत्थर के मंदिर, पत्थर की मूरत
जाने किस आस में बजती हैं घंटियाँ
चॉंद, सूरज, आकाश, तारे और
ब्रह्मांड की पहेलियाँ
संगमरमरी महल, गगनचुंबी इमारतें आकर्षित करती हैं धनाढ्यों की कोठियां
मुॅंह बनाकर, नज़रें चुराकर
न गुजरो दमघोंटू बस्तियों से
यहाँ भी मरमरी-सी सांस लेती हैं ज़िन्दगियाँ
जलचर, नभचर, जीव-जंतु, कीट-पतंगे और नर-नारियाँ
किसको किस रंग में रंगना
किसको किस ढंग से रखना
ये सब उसकी कलाकारियॉं

_गुरदीप कौर_
_मुरादाबाद (उ.प्र.)_

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