शिक्षा का बाजारीकरण और कोचिंग का प्रभाव: रुद्र का विश्लेषण
भारत: रुद्र ने शिक्षा के वर्तमान स्वरूप पर चिंता जताई है, जिसमें शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान और चरित्र निर्माण से हटकर केवल परीक्षा प्रबंधन बन गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज अब केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित रह गए हैं, जबकि डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का काम निजी कोचिंग संस्थानों ने ले लिया है। उन्होंने बताया कि स्कूल पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न में व्यापक अंतर है, जिससे छात्र असहाय महसूस करते हैं। JEE, NEET और CLAT जैसी परीक्षाएं रट्टा-मार और जटिल गणनाओं पर आधारित हो गई हैं, जो जानबूझकर बनाई गई है ताकि कोचिंग की मांग बनी रहे।
रुद्र ने कोचिंग संस्थानों को 'डर' बेचने वाला बताया, जो अभिभावकों और छात्रों में मानसिक दबाव पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षा के अधिकार को विशेषाधिकार में बदल रही है, जहां केवल अधिक फीस देने वाले परिवारों के बच्चे प्रतियोगिता में आगे बढ़ पाते हैं, जबकि मध्यम और निम्न वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र पिछड़ जाते हैं। रुद्र ने बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम का एकीकरण, स्कूलों में नवाचार और मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव का सुझाव दिया ताकि शिक्षा व्यापार से सेवा की ओर लौट सके और आने वाली पीढ़ियां सोचने-समझने वाली बन सकें।