डिजिटल हड़ताल का दूसरा दिन भी जारी, हड़ताल तोड़ने के प्रयासों का संघ ने किया विरोध
चाईबासा : झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन डिजिटल हड़ताल दूसरे दिन भी पूरे पश्चिम सिंहभूम जिले सहित राज्यभर में जारी रही. हड़ताल के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में संचालकों ने डिजिटल उपस्थिति का बहिष्कार करते हुए अपनी दस सूत्री मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई.
इसी बीच संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों के जिला प्रबंधकों द्वारा अलग-अलग परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं का हवाला देकर पंचायत स्तर पर कार्य प्रारंभ होने की बात कही जा रही है तथा वर्तमान हड़ताल को कमजोर करने और तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. संघ का कहना है कि हड़ताल के दौरान संचालकों पर मानसिक दबाव बनाकर उन्हें उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
पश्चिम सिंहभूम जिला संघ के जिला सचिव फानी भूषण ने कहा कि हड़ताल पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संचालित की जा रही है. उन्होंने जिला प्रबंधकों से अपील करते हुए कहा कि हड़ताल के बीच संचालकों को भ्रमित करने अथवा आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास नहीं किया जाए. उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं और योजनाओं को लेकर आज लगातार वर्चुअल बैठकें आयोजित की जा रही हैं, उन्हीं परियोजनाओं को लेकर पूर्व में कभी चार घंटे तक की वर्चुअल बैठकें आयोजित नहीं की गई थीं. ऐसे में हड़ताल के दौरान अचानक बढ़ी गतिविधियों को संचालक संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं.
श्री फानी भूषण ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं, आर्थिक शोषण और संचालकों के अधिकारों की अनदेखी के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि संघ की मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं और जब तक इन मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
वहीं संघ के सह सचिव रॉबिंसन हेब्रोन ने भी कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि प्रज्ञा केंद्र संचालकों को उद्यमी (Entrepreneur) माना जाता है, तो फिर प्रतिदिन सुबह 9 बजे और शाम 5 बजे डिजिटल उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य क्यों किया गया है. उन्होंने कहा कि एक ओर संचालकों को स्वतंत्र उद्यमी बताया जाता है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों की तरह उपस्थिति और कार्य अनुशासन लागू किया जाता है.
उन्होंने आगे कहा कि यदि संचालकों को वास्तव में डिजिटल पंचायत परियोजना का हिस्सा अथवा कर्मचारी माना जाता है, तो फिर उन्हें मात्र ₹2475 प्रति माह मानदेय क्यों दिया जा रहा है. जबकि झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर के अनुसार कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग मजदूरी तय की गई है. उनका आरोप है कि वर्तमान में प्रज्ञा केंद्र संचालकों को मिलने वाला मानदेय अकुशल श्रमिकों की निर्धारित मजदूरी से भी कम है, जो पूरी तरह अनुचित और निराशाजनक है.
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पंचायत स्तर पर वर्षों से सेवाएं प्रदान कर रहे संचालकों को उचित सम्मान, मानदेय और संसाधन उपलब्ध कराना सरकार एवं संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है. उन्होंने सभी संचालकों से एकजुट रहने और किसी भी प्रकार के दबाव या प्रलोभन में न आने की अपील की.
संघ का कहना है कि जब तक उनकी दस सूत्री मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक डिजिटल हड़ताल जारी रहेगी और आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.