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DMA की चेतावनी: रेजिडेंट डॉक्टरों के अवकाश और अधिकारों से समझौता नहीं, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई

*DMA की चेतावनी: रेजिडेंट डॉक्टरों के अवकाश और अधिकारों से समझौता नहीं, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई*

*- रेजिडेंट डॉक्टर्स के लिए DMA की राष्ट्रीय मुहिम: 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा और पर्याप्त अवकाश की मांग*
*- ‘रोहतक मॉडल’ अवकाश नीति को देशभर में लागू करने की मांग*

*पंजाब, जून (विक्की हरिंदर पाल):* डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स के अधिकारों, मानवीय कार्य परिस्थितियों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाते हुए चेतावनी दी है कि हरियाणा सहित सभी मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टर्स को वार्षिक, साप्ताहिक और आकस्मिक अवकाश निरंतर दिए जाने चाहिए। अवकाश में कटौती या रोक पर DMA कानूनी कार्रवाई करेगा।

*रोहतक मॉडल - अब राष्ट्रीय मिसाल*
पंडित B.D. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक ने 5 फरवरी 2025 को ऐतिहासिक आदेश जारी किया। इसके तहत:
1. *MD/MS/MDS रेजिडेंट* को साल के 52 रविवारों में सिर्फ 10 रविवार ड्यूटी।
2. बदले में *10 अतिरिक्त अवकाश* - परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक साथ ले सकते हैं।
3. *NMC गाइडलाइन* के अनुसार 20 आकस्मिक अवकाश का प्रावधान।

इस फैसले के लिए डॉ. अमित व्यास, डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, भानु कुमार और पूरी DMA टीम ने हरियाणा BJP प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बडोली, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, विधायक सावित्री देवी जिंदल, यूनिवर्सिटी VC और डीन से लगातार बातचीत कर रेजिडेंट डॉक्टरों के हित रखे।

*DMA की मुख्य मांगें - सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम 1992 के आधार पर:*
1. *48 घंटे/सप्ताह* से ज्यादा नियमित ड्यूटी न हो।
2. *एक बार में 12 घंटे* से ज्यादा लगातार ड्यूटी न करवाई जाए।
3. देश के कई कॉलेजों में आज भी 24, 30, 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करवाई जा रही है - ये मानवीय और नियमों के खिलाफ है।

*संविधान और BNS का हवाला*
DMA ने कहा कि संविधान का *अनुच्छेद 21* जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, और *अनुच्छेद 42* मानवीय कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की बात करता है।

अगर किसी रेजिडेंट को नींद-भोजन से वंचित रखकर 24-36 घंटे ड्यूटी, मानसिक उत्पीड़न या सार्वजनिक अपमान किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों पर *भारतीय न्याय संहिता BNS* के तहत केस बन सकता है:
1. *मानवीय कार्य परिस्थिति उल्लंघन*: Section 74, 75 BNS
2. *नींद/भोजन से वंचित, थकावट*: Section 120, 125 BNS
3. *24-36 घंटे अमानवीय ड्यूटी*: Section 125, 146 BNS
4. *मानसिक उत्पीड़न, अपमान*: Section 351, 352 BNS

*DMA इंडिया की राष्ट्रीय मांग:*
1. हर मेडिकल कॉलेज में रोहतक मॉडल की अवकाश नीति लागू हो।
2. सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम 1992 सख्ती से लागू हो।
3. 24-36 घंटे की लगातार ड्यूटी प्रथा तुरंत बंद हो।
4. रेजिडेंट डॉक्टरों के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा हो।

*DMA राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. व्यास का अल्टीमेटम:*
"किसी भी कॉलेज, विभाग या प्रशासन द्वारा अवकाश रोकना या मनमाने तरीके से खत्म करना अस्वीकार्य है। अगर किसी संस्थान ने नियमानुसार अवकाश देने से इनकार किया, तो DMA संगठनात्मक, प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कठोर कदम उठाएगा।"

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