स्टेशन किनारे ब्लैक मनी का सम्राज्य! दमदम और सोदपुर स्टेशन की दुकानों का खूफिया गणित
२ जून २०२६, कोलकाता: क्या रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर कचौड़ी और चाय बेचने वाले वाकई उतने ही गरीब हैं जितने वो दिखते हैं? या फिर इन छोटी-सी गुमटियों के पीछे लाखों रुपये का ऐसा खेल चल रहा है जो टैक्स विभाग और सरकार की नजरों से कोसों दूर है? आज हम आपको उत्तर 24 परगना के दो सबसे व्यस्त स्टेशनों—दमदम (Dum Dum) और सोदपुर (Sodepur) की दो दुकानों के जरिए इस अनअकाउंटेड (बिना हिसाब-किताब वाले) बिजनेस का वो सच दिखाएंगे, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।
केस स्टडी 1: दमदम स्टेशन (प्लेटफॉर्म नंबर 2) – 'अतनु कचौड़ी सेंटर'
दमदम स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर स्थित 'अतनु कचौड़ी सेंटर' पर अमूमन हर वक्त 4 से 5 लोग खड़े होकर कचौड़ी का लुत्फ उठाते दिख जाएंगे। यहां 20 रुपये में 3 पीस कचौड़ी मिलती है। आइए करते हैं इसका सीधा गणित:
हर 2 मिनट में एक ग्राहक: ₹20 की बिक्री।
1 घंटे की कमाई: 30 \times 20 = ₹600
10 घंटे (सुबह 8 से शाम 6 बजे) की रोजाना बिक्री: 600 \times 10 = ₹6,000
30 दिन (एक महीना) का कुल टर्नओवर: 6000 \times 30 = ₹1,80,000
'कट मनी' का खेल:
स्थानीय सूत्रों और कयासों की मानें तो इन प्लेटफॉर्म्स पर दुकान चलाने के लिए 'कट मनी' या हफ्ता देना पड़ता है। प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर कथित तौर पर स्थित पार्टी ऑफिस का खर्च भी इन्हीं से निकलता है। अगर हम मंदी का दौर मानकर और ₹40,000 प्रति महीना इस कथित 'कट मनी' या वसूली का घटा भी दें, तो भी इस एक दुकान से शुद्ध 1 लाख रुपये महीना बचता है।
बड़ा सवाल: पिछले 10-15 सालों से यह दुकान ऐसे ही चल रही है। 3-4 लड़कों का घर इससे चलता है, जो अच्छी बात है। लेकिन इस 'unaccounted' यानी बिना रिकॉर्ड वाले लाखों के बिजनेस का हिसाब कौन रखेगा? क्या यह यूं ही चलता रहेगा?
केस स्टडी 2: सोदपुर स्टेशन (प्लेटफॉर्म नंबर 2) – चाय की दुकान
अब बात करते हैं सोदपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 के ठीक बीच में स्थित एक मशहूर चाय की दुकान की। इसे दो लड़के मिलकर चलाते हैं। यहां मिलने वाली ₹6 और ₹10 वाली चाय के मुरीद सैकड़ों लोग हैं। यह दुकान सुबह 7 बजे (या उससे पहले) खुलकर रात 8 बजे तक, यानी करीब 12 घंटे चलती है।
यदि हम बिस्कुट की बिक्री छोड़ दें और सिर्फ ₹10 वाली चाय का न्यूनतम हिसाब जोड़ें:
हर घंटे औसतन ग्राहक: 15 से 20 लोग
1 दिन की न्यूनतम कमाई: 15 \times 12 \times 10 = ₹1,800
1 महीने का बिजनेस: 1800 \times 30 = ₹54,000
एक छोटी सी चाय की दुकान से हर महीने ₹54,000 का कैश बिजनेस सीधे तौर पर जेब में जा रहा है।
कड़वा सच: कोई गरीब नहीं है, बस टैक्स के दायरे से बाहर है!
यह आंकड़े किसी भी आम नौकरीपेशा इंसान को चौंका सकते हैं जो महीने के अंत में अपनी सैलरी से भारी-भरकम टीडीएस (TDS) और इनकम टैक्स कटवाता है। स्टेशन के इन प्लेटफॉर्म्स पर रोजाना लाखों का कैश ट्रांजैक्शन होता है, जिसका कोई पक्का बिल नहीं होता, कोई जीएसटी (GST) नहीं कटता और न ही यह पैसा सीधे तौर पर बैंकिंग सिस्टम में दिखाई देता है।
सुनने में यह बातें शायद कड़वी लगें, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर होने वाला यह फुटपाथ और प्लेटफॉर्म का बिजनेस आज की तारीख में किसी सोने की खदान से कम नहीं है। अब देखना यह है कि क्या रेलवे प्रशासन और आयकर विभाग कभी इन 'प्लेटफॉर्म के करोड़पतियों' पर अपनी नजर इनायत करेगा?