एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान को सफल बनाने के लिए सभी वर्गों की सहभागिता जरूरी : अतिरिक्त उपायुक्त निशा यादव
पंचकूला में एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित
महिलाओं और बच्चों में एनीमिया रोकने के लिए नियमित जांच व संतुलित आहार आवश्यक - निशा यादव
पंचकूला, 2 जून : अतिरिक्त उपायुक्त श्रीमती निशा यादव की अध्यक्षता में आज लघु सचिवालय के सभागार में एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनीमिया (खून की कमी) को जड़ से समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि एनीमिया मुक्त हरियाणा अभियान तभी सफल होगा जब समाज के सभी वर्ग मिलकर इस दिशा में योगदान दें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान की निगरानी नियमित रूप से की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति आयरन की दवाओं से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि एनीमिया को रोकने के लिए आयरन की प्रचुर मात्रा वाले खाद्य पदार्थ जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेंथी, सरसों, बथुआ) अनाज(बाजरा) दाल और फलियां(चना, लोबिया, सोयाबीन) बादाम आदि तिलहन (मूंगफली) और गुड़ आदि सेवन करने चाहिए। भोजन से आयरन का अवशोषण बढ़ाने के लिए विटामिन सी की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ जैसे ताजा हरी धनिया चटनी, दाल में नींबू का रस, अंकुरित दाले, सब्जी के सलाद, आँवला, नींबू, तरबूज, अमरुद, संतरा आदि का सेवन करें।
डॉक्टर शीनम, जिला नोडल अधिकारी ने बताया कि एनीमिया विशेषकर महिलाओं, गर्भवती माताओं और बच्चों में तेजी से फैलने वाली एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसे रोकने के लिए आयरन एवं फोलिक एसिड की नियमित खुराक, संतुलित आहार, और समय पर स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में एनीमिया जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का पता चल सके और उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इसके अतिरिक्त नागरिकों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है। निजी विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एनीमिया उन्मूलन माह के अंतर्गत शिविरों के आयोजन हेतु सक्रिय सहयोग प्रदान करें। साथ ही, विद्यालय स्तर पर हीमोग्लोबिन (एचबी) जांच तथा आयरन-फोलिक एसिड (आईएफए) अनुपूरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि सभी पात्र विद्यार्थियों को समय पर लाभ प्रदान किया जा सके।
उन्होंने बताया कि नोडल शिक्षक या अध्यापक अपने स्कूल में कक्षा 1 से 5 में पढ़ने वाले सभी बच्चों को आईएफए की एक गुलाबी गोली तथा 6 से 12 कक्षा में पढ़ने वाले सभी बच्चों को आईएफए की एक नीली गोली हफ्ते में एक बार मिड डे मील या दोपहर के भोजन के बाद अपनी निगरानी में अवश्य दें। स्कूल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 5 से 19 वर्ष के स्कूल जाने वाले बच्चों को साल में दो बार कृमि नियंत्रण की दवाई खिलाएं। एनीमिया मुक्त हरियाणा कार्यक्रम के अंतर्गत ब्लॉक सीएससी/पीएचसी पर होने वाले प्रशिक्षण में भाग ले और कार्यक्रम के बारे में स्कूल के दूसरे शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दे। लगभग एक माह के लिए आईएफए की ( नीली और गुलाबी) गोलियों की प्राप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करें और अनुपलब्धता/पर्याप्तता के मामले में अपने ब्लॉक कार्यालय में संपर्क करें और सूचित करें और माता-पिता/अभिभावकों की मीटिंग के साथ-साथ उनको एनीमिया, अच्छी सेहत और स्कूलों में समग्र प्रदर्शन को बेहतर करने में आईएफए की खुराक के लाभों के बारे में बताएं। एनीमिया की रोकथाम में पोषण, पौष्टिक भोजन और साफ-सफाई के महत्व के बारे में मॉर्निंग असेंबली में बताएं और इस पर स्कूल में युवा महोत्सव और अन्य व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम आयोजित करें। माता-पिता अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि नियमित व पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार और आईएफए की खुराक लेने से संपूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास होता है।
उन्होंने बताया कि हर हफ्ते एक आयरन फोलिक एसिड की टेबलेट आयु अनुसार (गुलाबी या नीली) गोली ले। आईएफए की खुराक का सेवन करने के बाद कुछ लोगों में शिकायत हो सकती है जैसे कि काला मल, चक्कर आना उल्टी और पेट दर्द मगर घबराएं नहीं यह सामान्य बात है। यह शिकायत शुरुआत में होती है और आईएफए की खुराक के नियमित सेवन से दूर हो जाती हैं। हर 6 महीने में एक कृमि नियंत्रण (आंत के कीड़े मारने वाली) टेबलेट अवश्य लें। सहायता के लिए नजदीकी सीएससी/पीएचसी या एएनएम से संपर्क करें।
उन्होंने बताया कि एनीमिया एक विकार है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनकी ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता शरीर की क्रियात्मक जरूरत को पूरा करने के लिए अपर्याप्त होती हैं।
उन्होंने बताया कि एनीमिया एवं कृमि संक्रमण की रोकथाम के लिए आसपास सफाई रखें, जूते पहने, खुले में शौच न करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें, अपने हाथ साबुन से धोयें, विशेष कर खाने से पहले और शौच के बाद, साफ पानी से फल व सब्जियां धोए, हमेशा साफ पानी पिए, खाने को ढक कर रखें, नाखून साफ और छोटे रखें।
इस अवसर पर डिप्टी सिविल सर्जन आरबीएसके, एनएचएम, डिस्ट्रिक्ट नोडल अफसर, एनीमिया मुक्त हरियाणा पंचकूला, शिक्षा विभाग के सदस्य, प्रतिनिधि ब्लॉक एजुकेशन अफसर पिंजोर, प्रतिनिधि ब्लॉक एजुकेशन अफसर बरवाला, सभी अर्बन और रूरल डिस्पेन्सरिओ के अधिकारी, और आंगनवाड़ी अफसर मौजूद रहे।