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सूर्या चौहान हत्याकांड: हत्या पर चुप्पी, एनकाउंटर पर राजनीति क्यों?



गाजियाबाद के चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड में मुख्य आरोपी असद के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक युवक की निर्मम हत्या हुई, तब कई राजनीतिक और सामाजिक चेहरे खामोश क्यों थे, लेकिन जैसे ही आरोपी पुलिस कार्रवाई में मारा गया, बयानबाजी का दौर शुरू हो गया।

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पीड़ित परिवार के दर्द पर कम और आरोपी के अधिकारों पर ज्यादा चर्चा क्यों हो रही है? लोगों का कहना है कि अपराधियों के प्रति सहानुभूति दिखाने वाले अक्सर पीड़ितों के लिए उतनी मुखरता नहीं दिखाते।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में न्यायिक प्रक्रिया सर्वोपरि है, वहीं दूसरी तरफ जनता का एक वर्ग यह भी कह रहा है कि लगातार बढ़ते जघन्य अपराधों पर कठोर कार्रवाई का संदेश जाना जरूरी है।

सूर्या चौहान की हत्या ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि समाज की पहली संवेदना पीड़ित और उसके परिवार के साथ होनी चाहिए या फिर आरोपी की कानूनी लड़ाई के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जानी चाहिए।

फिलहाल यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून, राजनीति और जनभावनाओं के टकराव का बड़ा विषय बन चुका है।

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